Saturday, April 13, 2024
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सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा की शाही मस्जिद के सर्वे पर लगाई रोक, मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट करे सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के मथुरा में शाही मस्जिद के सर्वेक्षण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं की विचारणीयता के खिलाफ मस्जिद पक्ष की याचिका पर भी हाई कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले सर्वेक्षण का आदेश दिया था, जबकि शाही ईदगाह समिति ने सभी मामलों को मथुरा के जिला न्यायालय से उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का विरोध किया है. बता दें कि इस मामले पर अगली सुनवाई अब 23 जनवरी 2024 को होगी.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 को मथुरा की शाही मस्जिद मामले में अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने तब मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद स्थल पर एक सर्वेक्षण को मंजूरी दी थी. कोर्ट ने जमीन का सर्वे एडवोकेट कमिश्नर से कराने की मांग भी मान ली थी. कोर्ट ने अपने फैसले में ज्ञानवापी विवाद के तर्ज पर मथुरा में शाही मस्जिद परिसर का एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराने का आदेश दिया था.

याद रहे कि भगवान श्री कृष्ण विराजमान और सात अन्य ने वकील हरि शंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडे और देवकी नंदन के माध्यम से याचिका दायर की थी. हिंदू पक्ष दावा करता है कि इस मस्जिद के नीचे भगवान कृष्ण का जन्म स्थान है और ऐसे कई संकेत हैं जो साबित करते हैं कि मस्जिद वास्तव में एक हिंदू मंदिर है.

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन के अनुसार, उच्च न्यायालय में दायर याचिका में दावा किया था कि वहां एक कमल के आकार का स्तंभ है, जो हिंदू मंदिरों की एक विशेषता है, और हिंदू देवताओं में से एक शेषनाग की प्रतिकृति है, जो जन्म के बाद भगवान द्वारा संरक्षित किया गया था.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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