Home Blog

*अरब शिखर सम्मेलन: गाजा पट्टी में इज़राइल की क्रूर आक्रामकता को तत्काल समाप्त करने की मांग*

बहरीन में आयोजित 33वें अरब शिखर सम्मेलन में इज़राइल से मांग की गई कि वह गाजा पट्टी में जारी बर्बर आक्रमण को तुरंत रोके और गाजा पट्टी से अपने सैनिकों की पूर्ण वापसी के बाद फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय शांति सेना तैनात करे.

 

अरब शिखर सम्मेलन की शुरुआत में मेजबान देश बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा ने मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आह्वान किया.

 

सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अपने भाषण में स्पष्ट रूप से कहा कि गाजा पट्टी में जारी इज़राइली आक्रामकता किसी भी तरह से अस्वीकार्य है.

 

सम्मेलन के अंत में जारी घोषणा में गाजा पट्टी में जारी इज़राइली आक्रामकता को रोकने और घेराबंदी ख़त्म करने की मांग की गई और कहा गया कि फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों से इज़राइली सेना को पूरी तरह से वापस बुलाया जाए और एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना बनाई जाए तैनात किया जाना चाहिए.

 

घोषणापत्र में इज़राइली बलों द्वारा राफा क्रॉसिंग के फिलिस्तीनी हिस्से पर कब्जे की निंदा की गई और फिलिस्तीनियों के जबरन निष्कासन को दृढ़ता से खारिज कर दिया गया.

 

बहरीन सम्मेलन में भाग लेने वालों ने इज़राइल से राफ़ा सीमा खाली करने का आह्वान किया ताकि गाजा पट्टी के पीड़ितों को मानवीय सहायता प्रदान की जा सके.

 

शिखर सम्मेलन में सूडानी सेना और रैपिड फोर्सेज के बीच मतभेदों को खत्म करने और शांति स्थापित करने के महत्व पर भी बातचीत की गई, और मांग की गई कि वो जेद्दा में वार्ता का पालन करें. शिखर सम्मेलन में सीरियाई संघर्ष को हल करने के महत्व पर भी जोर दिया गया.

 

बहरीन शिखर सम्मेलन की घोषणा में यमनी राष्ट्रपति परिषद के समर्थन पर जोर दिया गया, और लाल सागर में जहाजों पर हमलों की भी कड़ी निंदा की गई.

– यूसुफ़ अंसारी

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मणिपुर के थौबल से “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” की शुरुआत कर दी है. मकर संक्रांति के दिन इस यात्रा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस ने पूरा दम दिखाया. मणिपुर में राहुल गांधी और उनकी यात्रा को लेकर खासा उत्साह दिखा. रैली के लिए खासतौर पर बनाए गए रैली स्थल ‘न्याय मैदान’ में मणिपुर के लोग कई घंटे राहुल गांधी के इंतजार में बैठे रहे. इनमें महिलाओं की तादाद ज्यादा थी. स्थानीय लोगों में कांग्रेस और राहुल गांधी के प्रति काफी हमदर्दी दिखी. मीडिया से बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने मणिपुर से अपनी यात्रा शुरू करने के लिए राहुल गांधी की तारीफ की.

*कांग्रेस ने झोंकी की पूरी ताक़त*

राहुल गांधी की “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” को कामयाब बनाने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी. दिल्ली से इंडिगो की एक पूरी फ्लाइट बुक करके करीब 200 नेता एक साथ मणिपुर पहुंचे. इनमें कांग्रेस कार्य समिति के सदस्य, महासचिव, प्रवक्ता, तीन राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के साथ-साथ सभी राज्यों प्रदेश अध्यक्ष और विधायक दल के नेता शामिल थे. अपने तमाम नेताओं को मणिपुर में एक मंच पर बैठकर कांग्रेस ने यहां के स्थानीय लोगों को यह संदेश देने की कोशिश की है कि पूरी कांग्रेस दुख की इस घड़ी में उनके साथ है. रैली के मंच से कांग्रेस के लगभग हर नेता ने प्रधानमंत्री के पिछले आठ महीना के दौरान मणिपुर नहीं आने पर, हर नेता की बात पर मणिपुर के लोगों ने तालियां बजाकर कांग्रेस का हौसला बढ़ाया. इतने सारे नेताओं को एक मंच पर देखकर मणिपुर के लोगों हैरान भी थे. यह हैरानी इसलिए भी थी कि जहां सुरक्षा की दृष्टि से लोगों को आने के लिए मना किया जा रहा है, वहां पूरी कांग्रेस ही उठकर चली आई है.

*यात्रा राजनीतिक या गैर राजनीतिक?*

राहुल गांधी की यात्रा राजनीतिक है या गैर राजनीतिक? इसे लेकर बहस छिड़ी हुई है.

कांग्रेस की तरफ से दावा किया जा रहा है कि राहुल गांधी की “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” राजनीतिक या चुनावी यात्रा नहीं है. रविवार रात को पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस के महासचिव और मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने साफ कहा था कि यह यात्रा राजनीतिक और चुनावी यात्रा नहीं है. यह यात्रा राजनीतिक पार्टी की है इसके मकसद राजनीतिक हैं, लेकिन यात्रा राजनीतिक नहीं बल्कि वैचारिक है, लेकिन इस दावे की पोल उस वक्त खुल गई जब रैली के मंच से राजनीतिक भाषण हुए, कांग्रेस के छोटे नेताओं से लेकर खुद राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राजनीतिक बातें कहीं. बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमले बोले. कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से जब इस विरोधाभास के बारे में पूछा गया तो उन्होंने साफ कहा कि राजनीतिक पार्टी के मंच पर राजनीतिक बातें नहीं होगी तो फिर कहां होगी?

*क्या कहा खरगे ने?*

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मणिपुर से 12 जून या यात्रा शुरू करने के लिए राहुल गांधी की जमकर तारीफ की उन्होंने राहुल की शान में शेर भी पढ़ा,

‘जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का

फिर देखना फ़िज़ूल है क़द आसमान का’

मणिपुर हिंसा को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि मणिपुर में मोदी जी वोट लेने आते हैं, लेकिन मणिपुर के लोग संकट में फंसे हैं तो वह इधर नहीं दिखते. मोदी जी, समंदर की सैर कर सकते हैं लेकिन मणिपुर नहीं आ सकते. राहुल गांधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ मणिपुर से शुरू कर रहे हैं, ये बहुत बड़ी बात है. मणिपुर का युवा बेरोजगार है, खिलाड़ी प्रशिक्षण नहीं कर पा रहे हैं. बच्चों की पढ़ाई बंद है. लेकिन मोदी सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ रहा. कांग्रेस अहिंसा और शांति चाहती है. देश के पूर्वोत्तर इलाकों को उनके स्टेटहुड से लेकर बड़ी-बड़ी योजनाएं कांग्रेस सरकार ने दी, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद केवल पब्लिसिटी चालू है. उन्होने कहा कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ देश में लोकतंत्र और संविधान को बचाने एवं भावी पीढ़ियों के भविष्य के निर्माण के लिए है.

*राहुल ने भरी हुंकार*

मंच पर तमाम कांग्रेसियों और मैदान में मणिपुर मणिपुर के स्थानीय लोगों की भीड़ देखकर राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा कि पिछले 8 महीने से मणिपुर हिंसा की आग में झुलस रहा है. देश के प्रधानमंत्री को मणिपुर के लोगों की खैरियत लेने की फुर्सत नहीं है वो मणिपुर एक बार भी नहीं आए. प्रधानमंत्री का यह रवैया शर्मनाक है. राहुल ने कहा, ’29 जून को मैं मणिपुर आया था और उस विजिट में जो मैंने देखा, जो मैंने सुना… मैंने पहले कभी नहीं देखा था, नहीं सुना था. 2004 से मैं राजनीति में हूं, पहली बार मैं हिंदुस्तान के एक प्रदेश में गया, जहाँ गवर्नेंस का पूरा का पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर कोलेप्स (collapse) कर गया था. जिसको हम मणिपुर कहते थे, 29 जून के बाद वो मणिपुर रहा ही नहीं…. बंट गया, कोने-कोने में नफ़रत फैली, लाखों लोगों को नुकसान हुआ, भाई-बहन, माता-पिता आंखों के सामने मरे और आज तक हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री मणिपुर में आपके आंसू पोंछने, आपसे गले लगने, आपका हाथ पकड़ने नहीं आए… शर्म की बात है। शायद नरेंद्र मोदी जी के लिए, बीजेपी और आरएसएस के लिए मणिपुर हिंदुस्तान का भाग ही नहीं है. आपका जो दुख है, आपका दर्द है… वो उनका दुख, उनका दर्द नहीं है.’

स्थानीय लोगो से मिले राहुल

रैली के बाद “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” पर बस में बैठकर निकले. राहुल गांधी कुछ दूर चलने के बाद एक जगह रुके और स्थानीय लोगों से काफी देर तक बातचीत की. वहां कुछ नौजवानों ने राहुल गांधी को घेर लिया और उन्हें कुछ स्थानीय समस्याएं बताईं. इन नौजवानों ने वही साल उठाया जो राहुल गांधी अपनी रैली में उठा चुके थे. नौजवानों ने कहा कि जब राहुल गांधी यहां आ सकते हैं तो देश के प्रधानमंत्री यहां क्यों नहीं आते हैं? राहुल गांधी ने एक चाय की दुकान में जाकर स्थानीय लोगों के साथ बैठकर चाय पी. राहुल सुरक्षा की परवाह न करते हुए स्थानीय लोगों से मिले. राहुल गांधी के इस रवैये से उनके सुरक्षाकर्मी थोड़ा परेशान भी दिखे. राहुल गांधी रैली में ऐलान कर चुके थे कि वह यहां अपने मन की बात कहने नहीं बल्कि यहां के लोगों के मन की बात सुनने आए हैं. यात्रा के दौरान यही वह करते भी दिखे.

*स्थानीय लोगों में दिखा उत्साह*

राहुल गांधी और उनकी “भारत जोड़ो न्याय यात्रा” को लेकर मणिपुर के स्थानीय लोगों में खासा उत्साह दिखा. जिस रास्ते से राहुल गांधी की यात्रा गुजर रही थी, उस रास्ते पर दोनों तरफ महिलाएं पुरुष और बच्चे उनका स्वागत करने के लिए फूल मालाएं लिए खड़े थे. रात होने पर सड़क के दोनों तरफ खड़े लोगों ने हाथों में मशालें जलाकर राहुल गांधी का स्वागत किया. जिस स्थान पर राहुल गांधी की यात्रा समाप्त होनी थी वहां से करीब एक किलोमीटर दूर तक सड़क के दोनों तरफ लोग राहुल गांधी के स्वागत के लिए मशालें जलाकर खड़े थे. स्थानीय लोगों के उत्साह को देखकर कांग्रेस का मनोबल बढ़ रहा है. भले ही कांग्रेस के नेता कह रहे हो की यात्रा चुनावी फायदे के लिए नहीं है, लेकिन सबको यही लगता है कि इस यात्रा के बाद उत्तर पूर्वी राज्यों में कांग्रेस के दिन फिर सकते हैं.

*क्या बदलेंगे उत्तर पूर्वी राज्यों के समीकरण?*

अपनी यात्रा शुरू करने से पहले राहुल गांधी ने कहा कि मणिपुर से यात्रा शुरू करने का उनका फैसला था. पार्टी में इस बात को लेकर बहस चल रही थी की यात्रा कहां से शुरू की जाए. पश्चिम से पूर्व या पूरब से पश्चिम? तब उन्होंने कहा की यात्रा मणिपुर से शुरू करनी चाहिए. यहां से एक बड़ा संदेश जाएगा. सवाल उठा रहा है कि क्या मणिपुर हिंसा के बहाने कांग्रेस इस यात्रा के सहारे उत्तर पूर्वी राज्यों में अपनी खोई हुई ज़मीन दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही है. लगता तो यही है. यही वजह है कि यात्रा की शुरुआत में ही कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी. इससे ये संदेश देने की भी कोशिश की है कि उत्तर पूर्वी राज्यों की जनता ने भले ही कांग्रेस को नकार दिया हो लेकिन कांग्रेस आज भी उनके हितों के लिए खड़ी है. इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए किए गए नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक के काम गिनाए.

*उत्तर पूर्वी राज्यों में कांग्रेस की खस्ता हालत*

उत्तर पूर्वी राज्यों में कांग्रेस की बेहद ख़स्ता हालत है. कभी उत्तर पूर्वी राज्यों में से ज्यादातर में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी. आज एक भी राज्य में कांग्रेस सत्ता में नहीं है. हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में मिजोरम में कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें ही मिली हैं. लोकसभा के पिछले दो चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरह सफाया हो गया. सात उत्तर पूर्वी राज्यों लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं. पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को असम की सिर्फ एक सीट मिली थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में भी लगभग यही हाल था.

राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा उत्तर पूर्वी राज्यों में पूरे 13 दिन रहेगी. इस दौरान यात्रा मणिपुर से शुरू होकर नागालैंड, असम, अरुणाचल प्रदेश से दोबारा असम से होते हुए मेघालय होकर पश्चिम बंगाल निकल जाएगी. राहुल गांधी इस दौरान उत्तर पूर्वी राज्यों के 28 जिलों से गुजरेंगे. उनकी यात्रा सबसे ज्यादा 8 दिन असम में रहेगी. कांग्रेस को इस यात्रा से उत्तर पूर्वी राज्यों में ठीक उसी प्रकार जीत की उम्मीद है, जैसे भारत जोड़ो यात्रा से तेलंगाना और कर्नाटक में बड़ी जीत मिली है. कांग्रेस को जीत की उम्मीद तो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी थी, लेकिन वहां उम्मीदों पर पानी फिर गया. राहुल गांधी की इस यात्रा का आग़ाज़ तो बहुत अच्छा हुआ है लेकिन अंजाम कैसा होगा यह चुनावी नतीजे बताएंगे.

राहुल गांधी ने कुकी बाहुल्य इलाकों से यात्रा निकाल कर दूरियां मिटाने की कोशिश की

दिन राहुल गांधी ने कुकी बाहुल्य इलाकों से यात्रा निकाल कर दूरियां मिटाने की कोशिश की। राहुल गांधी दोनों समुदाय के लोगों से अलग-अलग मिले। सुबह की खबर में जिस जगह से राहुल गांधी ने अपनी यात्रा की शुरुआत की है 2 जनवरी को यहां हिंसा में चार लोग मारे गए थे। उसके बाद भी कई जगह से हिंसा की खबरें आई हैं। राहुल गांधी ने दोनों समुदायों से के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की है। इससे ये संदेश गया है कि देश के प्रधानमंत्री को मणिपुर के लोगों की चिंता नहीं है लेकिन राहुल गांधी को चिंता है।

महिलाओं के सम्मान पर खास जोर

राहुल गांधी ने महिलाओं के सम्मान पर खास जोर दिया है। यही वजह है कि राहुल गांधी के यात्रा और को देखने करने महिलाएं बड़ी संख्या में आ रही है।

सोमवार को राहुल गांधी आदिवासी महिलाओं के निर्वस्त्र घुमाने वाले कांगपोकपी जिले से गुजरे। उसे जगह पहुंचकर महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए न्याय योद्धा बनने की अपील की जहां महिलाओं को निर्वस्त्र करके घूमने की शर्मनाक घटना हुई थी। यहां राहुल से मिलने बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची। राहुल गांधी महिलाओं को न्याय दिलाने की बात कर रहे थे तो कोई महिलाओं को भावुक होते हुए देखा गया। इस दौरान महिलाओं ने उन्हें न्याय दिलाने के साथ बेरोजगारी, पिछड़ेपन और महंगाई की समस्या से भी रुबरु कराया। राहुल ने कहा कि वह मणिपुर के लोगों के दर्द को महसूस कर सकते हैं। मणिपुर की जनता ने एक त्रासदी का सामना किया है। कांग्रेस फिर से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण बनाना चाहती है।

निशाने पर पीएम मोदी

अपनी यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को निशाने पर रखा है। लगभग हर जगह उन्होंने यह सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी मणिपुर क्यों नहीं आ रहे। सोमवार को कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और एनएसयूआई के प्रभारी कन्हैया कुमार ने भी मणिपुर मैं पिछले 8 महीने से चल रही हिंसा पर नरेंद्र मोदी की चुप्पी और उनके मणिपुर नहीं आने को लेकर जमकर हमला बोला। सामने बाकायदा प्रेस कांफ्रेंस करके पीएम नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया। कन्हैया कुमार पीएम मोदी पर ज्यादा आक्रामक दिखे उन्होंने दो टूक कहा कि वोटो के समीकरण के चलते नरेंद्र मोदी मणिपुर आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी के पास एसपीजी सुरक्षा है, हजारों करोड़ों का विमान है। बावजूद अगर वह मणिपुर नहीं आ रहे तो इसीलिए के वह यहां के लोगों की नाराजगी का सामना मत नहीं जुटा पा रहे।नं यही वजह है कि हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान वह मिजोरम भी नहीं जा पाए थे।

राहुल गांधी के नेतृत्व में भारत जोड़ो न्याय यात्रा की शुरुआत सोमवार को मणिपुर के सेकमाई से हुई। यहां से यात्रा इंफाल वेस्ट होते हुए कांगपोकपी पहुंची। इस दौरान सडक़ के दोनों किनारों पर हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए महिलाएं, युवतियों और स्टूडेंट्स का हुजूम जमा था। कई के हाथ में बैनर और ज्ञापन भी थे। इस दौरान राहुल ने महिलाओं और अन्य लोगों से उनकी समस्याएं जानी। इससे पहले न्याय यात्रा की शुरुआत पारंपरिक रूप से किए गए झंडारोहण से हुई। शाम को यह यात्रा पांच जिलों से होती हुई 257 किलोमीटर का सफर तय करती हुई मणिपुर-नागालेंड सीमा पर स्थित मऊ गेट पर समाप्त हुई। मणिपुर से यात्रा के गुजरने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि मणिपुर में जातीय विभाजन की खाई को पाटने में यह यात्रा कितनी मददगार साबित होगी?

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा की शाही मस्जिद के सर्वे पर लगाई रोक, मुस्लिम पक्ष की याचिका पर हाईकोर्ट करे सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश के मथुरा में शाही मस्जिद के सर्वेक्षण के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाओं की विचारणीयता के खिलाफ मस्जिद पक्ष की याचिका पर भी हाई कोर्ट को सुनवाई करनी चाहिए. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पहले सर्वेक्षण का आदेश दिया था, जबकि शाही ईदगाह समिति ने सभी मामलों को मथुरा के जिला न्यायालय से उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का विरोध किया है. बता दें कि इस मामले पर अगली सुनवाई अब 23 जनवरी 2024 को होगी.

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 को मथुरा की शाही मस्जिद मामले में अपना फैसला सुनाया था. हाई कोर्ट ने तब मथुरा में शाही ईदगाह मस्जिद स्थल पर एक सर्वेक्षण को मंजूरी दी थी. कोर्ट ने जमीन का सर्वे एडवोकेट कमिश्नर से कराने की मांग भी मान ली थी. कोर्ट ने अपने फैसले में ज्ञानवापी विवाद के तर्ज पर मथुरा में शाही मस्जिद परिसर का एडवोकेट कमिश्नर से सर्वे कराने का आदेश दिया था.

याद रहे कि भगवान श्री कृष्ण विराजमान और सात अन्य ने वकील हरि शंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, प्रभाष पांडे और देवकी नंदन के माध्यम से याचिका दायर की थी. हिंदू पक्ष दावा करता है कि इस मस्जिद के नीचे भगवान कृष्ण का जन्म स्थान है और ऐसे कई संकेत हैं जो साबित करते हैं कि मस्जिद वास्तव में एक हिंदू मंदिर है.

हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन के अनुसार, उच्च न्यायालय में दायर याचिका में दावा किया था कि वहां एक कमल के आकार का स्तंभ है, जो हिंदू मंदिरों की एक विशेषता है, और हिंदू देवताओं में से एक शेषनाग की प्रतिकृति है, जो जन्म के बाद भगवान द्वारा संरक्षित किया गया था.

ईरानी जनरल क़ासिम सुलेमानी की मज़ार के क़रीब धमाका, 103 की मौत, 141 लोग घायल 

तेहरान: ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल रहे क़ासिम सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर आयोजित समारोह में सिलसिलेवार कई धमाके हुए हैं.

ईरान सरकार के टीवी चैनल आईआरआईबी ने कहा है कि 103 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही 141 से अधिक लोगों के घायल होने की भी ख़बरें हैं. हालांकि शुरुआत में 20 लोगों के मरने की ख़बर सामने आई थी लेकिन बाद में ईरान के सरकारी मीडिया ने मरने वालों की संख्या 50 बताई. अब बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ कर 73 तक पहुंच गई है.

बता दें कि ये धमाके केरमान शहर की साहेब अल-ज़मान मस्जिद के करीब हुए हैं. इससे पहले समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से लिखा था कि “आतंकवादी हमले के तहत हुए दो धमाकों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हुए हैं.”

ये धमाके केरमान प्रांत में हुए हैं. धमाकों के बाद पूरे शहर में सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रखा गया है. इससे पहले सरकारी न्यूज़ एजेंसी नूर न्यूज़ ने कहा था कि मज़ार की ओर जाने वाली सड़क पर कई गैस कनस्तर भी छोड़े गए, कब्रिस्तान के प्रवेश द्वार के पास विस्फोटकों से भरे दो बैग रखे गए थे. विस्फोट के समय कासिम सुलेमानी की कब्र पर फातिहा पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे.

न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने सरकारी टीवी चैनल पर चलाए जा रहे विज़ुअल्स के हवाले से बताया है कि बचावकर्मी घायलों की मदद के लिए जुट गए हैं. ईरानी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण का कहना है कि घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए 5 अस्पतालों को हाई अलर्ट पर रखा गया है.

ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान में आज कासिम सुलेमानी की चौथी बरसी मनाई जा रही है. वह 3 जनवरी 2020 को इराक में अमेरिकी ड्रोन हमले में शहीद हो गए थे.

मुंबई की अंधेरी पश्चिम में स्थित ख्वान रेस्तरां एक आदर्श भोजन स्थल

मुंबई की अंधेरी पश्चिम में स्थित ख्वान रेस्तरां एक आदर्श भोजन स्थल है जहां हैदराबादी, दिल्ली, और अवधी स्वाद का अद्वितीय और बेहतरीन अनुभव है। यह रेस्तरां हाल ही में खुलकर तेजी से एक लोकप्रिय स्थान बन गया है, जो वास्तविक और पूरी तरह से स्वादिष्ट भोजन की तलाश में रहने वाले लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रहा है.

ख्वान में पहुंचते ही, आपको उच्चतम स्तर का स्वागत मिलता है। रेस्तरां की आंतरिक सजावट एक चार्म से भरी है, जो ग्राहकों की प्रतीक्षा कर रही स्वादों की समृद्धि को पूर्ति करती है। सुंदर डेकोर से लेकर समर्पित सेवा तक, ख्वान का हर पहलू उच्चतम स्तर की भोजन अनुभव को ऊँचाईयों तक उठाने के लिए कुशलता से रचा गया है।

ख्वान को अद्वितीय बनाने का वास्तविक तत्त्व यह है कि यह हैदराबादी, दिल्ली, और अवधी स्वाद का एक सच्चा अनुभव प्रदान करने का आदान-प्रदान करता है। ख्वान के शेफ़ ने पारंपरिक रेसिपीज़ को पुनर्निर्मित करने की कला को महारता के स्तर पर ले जाई है, यह सुनिश्चित करते हुए कि प्रत्येक व्यंजन अपनी मूलता और उसके स्रोत की सच्चाई को दर्शाता है।

खाने की उत्कृष्टता में विभिन्नता लाने वाली ख्वान की मेनू एक भोजन की अनुभूति में एक रसोई यात्रा है, जो प्रत्येक व्यंजन को पूर्णता के साथ तैयार किया गया है।

मुग़लई व्यंजनों के शौकीनों के लिए, ख्वान में सुगंधित कबाब, धनी ग्रेवीज़, और सुगंधित बिरयानियों का विविध सरगरम प्रस्तुत हैl

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच आज बड़े मुकाबले से शुरू होगा क्रिकेट का महाकुंभ

4 साल बाद आज से भारत में विश्व कप क्रिकेट महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. अहमदाबाद में उद्घाटन मैच में पिछले मेगा इवेंट की डिफेंडिंग चैंपियन इंग्लैंड और उपविजेता न्यूजीलैंड की टीमें आमने-सामने होंगी.

दुनिया की 10 सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट टीमें चमचमाती ट्रॉफी जीतने के लिए देश के 10 अलग अलग शहरों में मैचेज़ खेलेंगी.

इवेंट में सभी टीमें एक-दूसरे से खेलेंगी, पहला राउंड पूरा होने के बाद शीर्ष 4 टीमें सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेंगी.

विश्व कप का उद्घाटन मैच आज मौजूदा चैंपियन इंग्लैंड और उपविजेता न्यूजीलैंड के बीच अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. पहले मैच से दोनों टीमें वनडे क्रिकेट में आंकड़ों के मामले में संयोग से बराबर हैं.

इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने एक दूसरे के खिलाफ 95 मैच खेले हैं, दोनों टीमों ने 44 और 44 मैच जीते हैं, 3 मैच टाई रहे हैं और 4 मैचों का कोई नतीजा नहीं निकला है.

विश्व कप मुकाबलों में जीत के मामले में दोनों टीमें बराबर हैं, इनके बीच अब तक 10 मुकाबले हुए हैं और दोनों ने 5 और 5 मैच जीते हैं.

हालांकि, अहमदाबाद में जहां यह मैच हो रहा है, वहां न्यूजीलैंड का पलड़ा इंग्लैंड पर भारी है, जिसने 1996 वर्ल्ड कप के ग्रुप मैच में इंग्लिश टीम को 11 रनों से हराया था.

क्रिकेट के इस मेगा इवेंट में पाकिस्तान की टीम अपना पहला मैच शुक्रवार को नीदरलैंड के खिलाफ खेलेगी.

राजा महमूदाबाद का लंबी बीमारी के बाद निधन, लखनऊ में ली अंतिम सांस

आजादी से पहले जन्मे राजा महमूदाबाद मोहम्मद के नाम से मशहूर अमीर मोहम्मद खान का 80 साल की उम्र मे इलाज के दौरान निधन हो गया. वो पिछले कई महीनों से बीमार चल रहे थे. उनके बेटे सपा नेता प्रोफेसर अली खान ने उनके निधन की पुष्टि अपने फेसबुक पेज के जरिए दी. गुड़गांव के मेदांता हॉस्पिटल में राजा महमूदाबाद का इलाज चल रहा था. अली खान ने बताया कि उनके पिता राजा महमूदाबाद ने लखनऊ के कैसरबाग स्थित अपनी कोठी महमूदाबाद हाउस में बुधवार की सुबह करीब तीन बजे अंतिम सांस ली.

उधर राजा महमूदाबाद के निधन की खबर फैलते ही हर जगह शोक और हम की लहर दौड़ गई. अंतिम दर्शन के लिए राजा महमूदाबाद का शव कोठी महमूदाबाद हाउस में रखा गया और बुधवार शाम को कर्बला में अंतिम संस्कार हुआ. वहीं, जिले के स्कूलों में दो मिनट का मौन रखा और व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद रखी.

राजा महमूदाबाद अमीर मोहम्मद खान की सीतापुर और लखनऊ समेत आसपास के कई जिलों तक रियासत रह चुकी है. मगर उनके पूर्वजों के पाकिस्तान में बस जाने के बाद सरकार ने उनकी जायदाद को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित करते हुए अपने संरक्षण में ले लिया था.

शत्रु संपत्ति विवादों के चलते राजा महमूदाबाद लगातार सुर्खियों में बने रहते थे. करीब 50 हजार करोड़ से ज्यादा की संपत्ति को लेकर वह लगातार सरकार से मुकदमा लड़ते रहे. 1985 और 1989 तक, मोहम्मद अमीर खान महमूदाबाद विधानसभा से कांग्रेस के विधायक रहे हैं. राजा महमूदाबाद हमेशा अपने सामाजिक कार्यों और प्रॉपर्टी विवाद को लेकर चर्चा में रहे हैं. लखनऊ और प्रदेश भर में बहुत सी चर्चित इमारतों के वह मालिक रहे हैं.

राजा महमूदाबाद ने अपने पीछे पत्नी रानी विजया खान के साथ दो बेटे प्रोफेसर अली खान और राजकुमार अमीर हसन खान को छोड़ा है.

‘आप’ सांसद संजय सिंह गिरफ़्तार, बोले- ‘मरना मंजूर, डरना नहीं’, बीजेपी बोली- सच कभी छुप नहीं सकता’

दिल्ली से आम आदमी पार्टी के तेज तर्रार राज्यसभा सांसद संजय सिंह को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ़्तार कर लिया है.

ईडी ने बुधवार सुबह को ही संजय सिंह के घर पर छापा मारा था. कई घंटे की पूछताछ के बाद शाम होते होते संजय सिंह को गिरफ़्तार कर लिया गया है. याद रहे कि संजय सिंह की ये गिरफ़्तारी दिल्ली की आबकारी नीति में हुए कथित घोटाले को लेकर की गई है. इसी केस में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पहले से ही जेल में हैं.

संजय सिंह की गिरफ़्तारी के बाद आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स (ट्विटर) हैंडल पर संजय सिंह का एक वीडियो बयान जारी किया है. इसमें संजय सिंह ने कहा, “मोदी जी मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि जब जब ज़ुल्म बढ़ता है, तब तब उसके ख़िलाफ़ जनता की आवाज़ बुलंद होती है. मुझे मरना मंज़ूर है, डरना मंज़ूर नहीं है. चाहें जितनी यातनाएं मुझे दी जाएं, मैं नरेंद्र मोदी सरकार के भ्रष्टाचार, अदानी के महाघोटाले के ख़िलाफ़ बोलता रहूंगा.”

इस बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने संजय सिंह की गिरफ़्तारी पर सवाल उठाते हुए इसे ‘ग़ैरक़ानूनी’ बताया है. वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि ‘सच छुप नहीं सकता.’

दिल्ली बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने एक बयान जारी कर कहा है, “संजय सिंह की गिरफ़्तारी से एक बात सच हो गई है कि सच्चाई छुप नहीं सकती है. संजय सिंह ने शराब घोटाले में पैसे खाये थे. कल जब दिनेश अरोड़ा सरकारी गवाह बने थे तब ही ये तय हो गया था कि संजय सिंह गिरफ़्तारी से बच नहीं सकते हैं. संजय सिंह के बाद अरविंद केजरीवाल, अब देखिये होता है क्या.”

इस गहमागहमी के बीच ईडी टीम के साथ जाने के पहले संजय सिंह के अपनी मां के पैर छूए. कुछ देर बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और राष्ट्रीय जनता दल नेता मनोज झा परिजन को हौसला देने संजय सिंह के घर पहुंचे.

बुधवार सुबह संजय सिंह के आवास पर छापेमारी के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि ये छापे एक ‘ऐसी पार्टी (बीजेपी) की बदहवास कोशिश है जो अगला चुनाव हारने जा रही है.’ केजरीवाल ने कहा, “ईडी ने पिछले साल के दौरान कई बार छापे मारे हैं लेकिन उसे कुछ नहीं मिला है.”

सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक दूसरा ट्वीट करते हुए संजय सिंह की गिरफ़्तारी को ‘ग़ैरक़ानूनी’ बताया है. उन्होंने लिखा है, “संजय सिंह की गिरफ़्तारी बिलकुल ग़ैर क़ानूनी है. ये मोदी जी की बौखलाहट दर्शाता है. चुनाव तक ये कई और विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार करेंगे.”

बता दें कि संजय सिंह का नाम कथित शराब घोटाले में दायर ईडी की चार्जशीट में भी आया था. ये चार्जशीट पिछले साल दायर की गई थी. संजय सिंह का नाम व्यापारी दिनेश अरोड़ा के ईडी को दिए बयान में सामने आया था.

महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी-मुस्लिम महिलाओं को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए: जमाअत-ए-इस्लामी हिन्द

नई दिल्ली, 20 सितम्बर: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का कहना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित महिला आरक्षण विधेयक की बहुत जरूरत थी. अपितु, विधेयक में ओबीसी और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को भी आरक्षण दिया जाना चाहिए. मीडिया को जारी किए गए एक बयान में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, ‘एक मजबूत लोकतंत्र के लिए, सभी समूहों और वर्गों के लिए शक्ति के साझाकरण में प्रतिनिधित्व पाना महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा ‘आज़ादी के 75 साल बाद भी, संसद और हमारी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व काफी निराशाजनक है. उनकी संख्या को अनुपात तक लाने का प्रयास किया जाना चाहिए’. महिला आरक्षण विधेयक इस दिशा में एक अच्छा कदम है. दप्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, ‘यह काफी पहले आ जाना चाहिए था. अपने वर्तमान स्वरूप में विधेयक का मसौदा ओबीसी महिलाओं और मुस्लिम महिलाओं को बाहर करके भारत जैसे विशाल देश में गंभीर सामाजिक असमानताओं को संबोधित नहीं करता है’.

हालाँकि इस कानून में एससी और एसटी की महिलाओं को शामिल किया गया है, लेकिन इसमें ओबीसी और मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को नजरअंदाज किया गया है. जस्टिस सच्चर समिति की रिपोर्ट (2006), पोस्ट-सच्चर मूल्यांकन समिति की रिपोर्ट (2014), विविधता सूचकांक पर विशेषज्ञ समूह की रिपोर्ट (2008), भारत अपवर्जन रिपोर्ट (2013-14), 2011 की जनगणना और नवीनतम एनएसएसओ जैसी विभिन्न रिपोर्ट और अध्ययन रिपोर्ट सुझाव देते हैं कि भारतीय मुसलमानों और खासकर मुस्लिम महिलाओं का सामाजिक-आर्थिक सूचकांक काफी कमी है. संसद और राज्य विधानसभाओं में मुसलमानों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व लगातार घट रहा है। यह उनकी जनसंख्या के आकार के अनुपातिक नहीं है।”

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने कहा, “प्रस्तावित आरक्षण अगली जनगणना के प्रकाशन और उसके बाद परिसीमन अभ्यास के बाद ही लागू होगा. यानी बिल का फायदा 2030 के बाद ही मिल सकेगा. इस प्रस्ताव के समय से ज़ाहिर होता है कि इसे आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रख कर लाया गया है इसमें गंभीरता की कमी है। असमानता दूर करने के कई तरीकों में से एक है. सकारात्मक कार्रवाई (आरक्षण), महिला आरक्षण विधेयक में ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं को नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण होगा और “सब का साथ, सबका विकास” की नीति के अनुरूप नहीं होगा.”