Sunday, February 25, 2024
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विश्व स्वास्थ्य का दावा : भारत में कोरोना से हुई 47 लाख लोगों की मौत !

अंज़रूल बारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन के हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में पिछले दो साल में कोरोना महामारी से करीब 47 लाख लोगों की जाने गई है. रिपोर्ट के मुताबिक़ यह आंकड़ा दुनिया भर की मौतों का लगभग एक तिहाई है और सरकारी आंकड़े से करीब दस गुना ज्यादा है. रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में इस महामारी के शिकार करीब डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हुई है जो सरकारी डाटा से करीब तीन गुना अधिक है.
विश्व स्वास्थ संगठन का कहना है कि दुनिया में कोरोना से जो आधी मौतें दर्ज नहीं हुईं, वो तो सिर्फ भारत से ही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी की वजह से देश में तकरीबन 47 लाख से अधिक लोगों की मौत हुई थी. साथ ही ज्यादातर मौतें मई और जून 2021 में आई कोरोना लहर की पीक के दौरान हुईं थीं.
दूसरी तरफ, भारत सरकार का कहना है कि जनवरी 2020 से दिसंबर 2021 तक देश में सिर्फ 4 लाख 80 हजार मौतें ही हुई हैं. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार को विश्व स्वास्थ संगठन के आंकड़ों और मौतें गिनने के मेथड पर शक है. मगर इसके पहले भी हुई कई स्टडीज में कुछ ऐसे ही नतीजे देखने को मिले हैं. विश्व स्वास्थ संगठन का कहना है कि भारत ने सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टमयानी सीआरएस 2020 के नाम से जो रिपोर्ट जारी की है, फिलहाल उसका आकलन नहीं किया गया है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने महामारी के दौरान हुई मौतों में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों तरह की मौतों को शामिल किया है. यह आंकड़े जनवरी 2020 से दिसंबर 2021 तक के हैं. ऑफिशियल आंकड़े विश्व में सिर्फ 54 लाख मौतों की जानकारी ही देते हैं.
रिपोर्ट में ऐसे मरीजों को भी गिना गया है जिनकी मौत महामारी के दौरान अप्रत्यक्ष रूप से हुई थी. यानी, इसमें 95 लाख वो लोग भी शामिल हैं जो दूसरी बीमारियों से पीड़ित थे, लेकिन उन्हें सही वक्त पर इलाज नहीं मिल सका. विश्व स्वास्थ संगठन की मानें तो महामारी से पहले भी दुनिया में हर 10 में से 6 लोगों की मौत दर्ज नहीं की गई.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की थी. सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम 2020 नाम से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में देश में कुल 81.16 लाख लोगों की मौत हुई थी. इनमें से 45% लोगों को कोई मेडिकल ट्रीटमेंट नहीं मिला था. इलाज के अभाव में यह अब तक की सबसे ज्यादा मौतें हैं. 2019 में यह आंकड़ा देश भर में हुई मौतों का 34.5% था.
विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी के दौरान चीन, ऑस्ट्रेलिया, जापान और नॉर्वे जैसे देशों में अप्रत्यक्ष रूप से मौतें कम हुईं. जहां चीन में अब भी जीरो कोविड पॉलिसी अपनाई जा रही है, वहीं ऑस्ट्रेलिया में सख्त टेस्टिंग और आइसोलेशन फॉलो किया जा रहा है. दूसरी ओर, वैज्ञानिकों को अफ्रीका के 54 देशों में से 41 देशों के भरोसेमंद रिकॉर्ड्स नहीं मिल सके.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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