Saturday, April 20, 2024
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रूस-यूक्रेन जंग को लेकर तुर्की में शांति वार्ता, तो दिल्ली में कूटनीतिक तैयारी

अंज़रुल बारी
यूक्रेन और रूस के बीच जारी जंग का अंजाम क्या होगा कोई नहीं जनता. इस युद्ध में उक्रेन जहां तबाह हो चुका है वही रूस को भी भारी छति हुई है. इसके साथ ही दुनिया भर के देशों के साथ रूस और उक्रेन के व्यापारिक संबंधों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है. हालांकि इस जंग को रोकने के लिए प्रयास भी जारी हैं, और दुनिया भर के देश इस प्रयास में जुटे भी हुए हैं. इन प्रयासों में दिल्ली की भूमिका बढ़ती जा रही है. इसका वजह है भारत के रूस और उक्रेन के साथ बेहतर सम्बन्ध.
जंग को कैसे रोका जाए इसके लिए तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में शांति वार्ता चल रही है. लेकिन इसकी पूरी कूटनीतिक तैयारियों का केंद्र नई दिल्ली बना हुआ है. पिछले 10 दिन में 7 देशों के विदेश मंत्री और सुरक्षा सलाहकार भारत आ चुके हैं. भारत को अपने साथ लेने के लिए पूरा जोर लगाया हुआ है.
अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और यूनान तक के नेताओं ने इसके लिए भारत में हाजिरी लगाई है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव गुरुवार को नई दिल्ली पहुंचे. वो आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे. चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बाद रूसी विदेश मंत्री का यह दौरा भारत के अगले कूटनीतिक कदम की दिशा तय करने में मायने रखता है. डॉ. एस. जयशंकर फार्मूला नाम से जानी गई भारतीय कूटनीति अंतरराष्ट्रीय ताकतों के बीच संतुलन साधने पर केंद्रित है. अगले हफ्ते की जी-7 की बैठक के लिए भारतीय समर्थन जरूरी है.
भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के फॉर्मूले के मुताबिक रूस यूक्रेन जंग के शांतिपूर्ण समाधान के लिए तुरंत संघर्ष विराम पहली शर्त है. संघर्ष-विराम सैन्य स्तर पर ही नहीं बल्कि साइबर हमले, सूचना युद्ध, बयानों से हो रहे हमले इसमें शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय कानून और यूएन चार्टर का पूरा सम्मान हो और कोई भी समाधान उसके दायरे में हो. हर राष्ट्र की क्षेत्रीय अखंडता और सार्वभौमिकता का सम्मान किया जाए।. हर देश के लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों का हर हाल में सम्मान किया जाए और उनके आर्थिक हितों की रक्षा भी की जाए.
भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह गुटनिरपेक्षता के अपने उसूलों का पालन करेगा, लेकिन अपने हितों का त्याग नहीं करेगा. रूस से तेल लेने की भारत की कोशिशों को लेकर हो रहे विरोध को देखते हुए नई दिल्ली का यह रुख काफी साफ है.
दरअसल रूस-यूक्रेन की बीच एक महीने से भी ज्यादा समय से चल रहे युद्ध को विराम देने का फॉर्मूला भारत में बनाने की तैयारी है. रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव का अचानक भारत दौरा, इसी दिशा में अहम कदम है. आज इनकी पीएम मोदी से मुलाकात होगी. इसके बाद दो अप्रैल को इज़राइल के प्रधानमंत्री भारत आ रहे हैं. माना जा रहा है कि नफ्ताली के भारत आने पर जंग रोकने के कूटनीतिक प्रयासों को और बल मिलेगा.
जानकारी के मुताबिक रूसी विदेश मंत्री से बातचीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नफ्ताली के साथ बात करेंगे. नफ्ताली की यात्रा समाप्त होने के बाद मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दीमिर जेलेंस्की से बात करेंगे. दूसरी ओर, नफ्ताली भी यही करेंगे. इससे रूस-यूक्रेन के बीच शांति की राह निकलने की संभावना है.
गौरतलब है कि भारत अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार संघर्ष विराम की वकालत कर रहा है. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र में एक ही दिन में दो प्रस्तावों पर वोटिंग में भारत ने हिस्सा नहीं लिया था. एक प्रस्ताव यूक्रेन के पक्ष में था, जबकि दूसरा रूस के पक्ष में था. शांति के फॉर्मूले पर विस्तृत बातचीत रूस-यूक्रेन के बीच भी जारी है. भारत और इजरायल की भूमिका मतभेद के अहम पहलुओं को सुलझाने की है. 25 मार्च को अमेरिका की विदेश उपसचिव विक्टोरिया नुलैंड भी इसी मकसद से भारत आई थीं.
बता दें कि भारत के रिश्ते रूस से अच्छे हैं. इसी तरह यूक्रेन के पीछे खड़े अमेरिका से भी भारत की नजदीकियां हैं. मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में रूस और अमेरिका दोनों को ही भारत की जरूरत है, इसलिए विवाद सुलझाने में भारत की भूमिका अहम हो जाती है. क्वाड में भारत की हिस्सेदारी को लेकर अमेरिका उत्सुक है. वहीं, ब्रिक्स में पुतिन की चाहत है कि वह मोदी और शी जिनपिंग के साथ खड़े होकर पूरी दुनिया को रूस, चीन और भारत की एकजुटता दिखाएं.
इज़राइल का सबसे नजदीकी दोस्त अमेरिका है. दूसरी ओर, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दीमिर जेलेंस्की यहूदी हैं, जो इज़राइल के लिए अहम हैं. नफ्ताली इसलिए पहले से ही मध्यस्थता की पहल कर रहे हैं.
यूक्रेन में युद्ध खत्म कराने को लेकर भारत पहले से ही कोशिशें कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले एक महीने में पुतिन और जेलेंस्की के साथ फोन पर दो बार लंबी बातचीत की है.
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी पुतिन और जेलेंस्की से कई बार लंबी बातचीत कर चुके हैं. इसी दौरान मैक्रों और मोदी के बीच भी लंबी बातचीत हुई है. इन कोशिशों का मकसद युद्ध रोकना ही था. अमेरिका भी चाहता है कि भारत और इज़राइल युद्ध रोकने का फॉर्मूला तैयार करें.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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