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राष्ट्रपति भवन के मुग़ल गार्डन का बदला गया नाम, नई पहचान अमृत उद्यान 31 जनवरी से खुलेगा

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राष्ट्रपति भवन के मुग़ल गार्डन का बदला गया नाम, नई पहचान अमृत उद्यान 31 जनवरी से खुलेगा

मोदी सरकार ने एक बड़ा फ़ैसला लेते हुए, राष्ट्रपति भवन परिसर में बने मुग़ल गार्डन का नाम बदल कर अमृत उद्यान कर दिया है.मुग़ल गार्डन का नाम बदलने की मांग हिंदू महासभा ने की थी.

2019 में हिंदू महासभा ने मांग की थी कि मुग़ल गार्डन का नाम बदलकर राजेंद्र प्रसाद उद्यान कर दिया जाए.

उस वक़्त ये मांग नहीं मानी गई थी. लेकिन अब दिल्ली की एक पहचान बन चुके मुग़ल गार्डन को नया नाम दे दिया गया है.

बताया जा रहा है कि मुगल गार्डन का नाम अमृत महोत्सव के तहत बदला गया है. यह हर साल आम लोगों के लिए खुलता है. इस साल भी 31 जनवरी से खुलेगा. लोग यहां 12 बजे से रात नौ बजे तक यहां घूमने आ जा सकते हैं. बता दें लोग यहां ट्यूलिप और गुलाब की विभिन्न प्रजातियों के फूलों को देखने जाते हैं.

बता दें कि राष्ट्रपति भवन में 15 एकड़ के परिसर में बना ये बग़ीचा 1928-29 में तैयार हुआ था. मुग़ल गार्डन को बनाने की प्रेरणा, जम्मू-कश्मीर के मुग़ल गार्डन, ताजमहल के इर्द गिर्द फैले बाग़ीचे और यहां तक कि भारत और फ़ारस की पेंटिंग्स से मिली थी.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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