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मोरबी रेस्क्यू ऑपरेशन रुका, दो नवंबर को शोक दिवस मानेगा

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मोरबी रेस्क्यू ऑपरेशन रुका, दो नवंबर को शोक दिवस मानेगा

मोरबी के मच्छु नदी पर बने पुल के टूटने से अभी तक 150 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है. खबर के मुताबिक अभी भी सौ से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं. हालाकि तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन को रोक दिया गया है. यह घटना कैसे घटी, इस पर सबकी नजर जा टिकी है. इस बीच बीते देर शाम को प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ी बैठक की है और 2 नवंबर को राज्य में शोक दिवस मनाने की घोषणा की है. लेकिन अब इस पुल के टूटने और पुल की मरम्मत करने वाली कंपनी अजंता पर सबकी टेढ़ी निगाहें लगी है. बता दें कि अजंता कंपनी घड़ी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बनाती है. उसे पुल बनाने का कोई अनुभव नहीं होने के बाद भी उसे पुल मरम्मत का काम दे दिया गया था. खबर के मुताबिक अजंता कंपनी के मालिक का बीजेपी के साथ बेहतर सरोकार रहे हैं.

143 साल पुराने इस पुल की मरम्मत के लिए एक निजी फर्म को ठेका दिया गया था. कई महीनों तक मरम्मत का काम करने के बाद अभी कुछ दिन पहले ही इस पुल को जनता के लिए फिर से खोल दिया गया था. हालांकि इस पुल को नगर पालिका से फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं मिला था.

खबर के मुताबिक ये पुल अजंता ओरेवा कंपनी को संचालन और रखरखाव के लिए 15 सालों के लिए दिया गया था. अनुबंध मार्च 2022 में मोरबी नगर निगम और अजंता ओरेवा कंपनी के बीच हस्ताक्षरित किया गया था और ये अनुबंध साल 2037 तक वैलिड था. इस समझौते में इस बात का भी जिक्र है कि कंपनी को रखरखाव के काम के लिए कम से कम 8 से 12 महीने का समय दिया जाना चाहिए.

हालांकि, कंपनी ने समझौते की शर्तों और समझौतों की अवहेलना की और महज पांच महीनों में ही इस पुल को आम जनता के लिए खोल दिया.

जनवरी 2020 में तत्कालीन कलेक्टर के साथ में मोरबी नगर निगम और अजंता ओरेवा कंपनी के अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. जिसके बाद समझौते की शर्तें तय की गईं. यह तय किया गया कि टिकट की कीमत में हर साल 2 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी.

उधर पीएम मोदी ने गुजरात के राजभवन में देर शाम मोरबी हादसे पर अपडेट लेकर जरूरी दिशा निर्देश दिए. उन्होंने सीएम के साथ गुजरात के बाकी अमले से भी स्थिति पर चर्चा की और कहा कि कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए. उनका कहना था कि पीड़ित लोगों की सहायता के लिए प्रशासन खुद से आगे आए. हादसा बड़ा है, कोताही नहीं होनी चाहिए. गुजरात सरकार ने फैसला लिया है कि 2 नवंबर को शोक दिवस मनाया जाएगा. उस दिन सारे सूबे में राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुकाकर रखा जाएगा. उस दिन कोई सरकारी और राजनीतिक कार्यक्रम नहीं होगा.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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