Home ताज़ातरीन भारत – चीन तनाव के बीच दोनो देशों के बीच कुलांचे मरता व्यापार

भारत – चीन तनाव के बीच दोनो देशों के बीच कुलांचे मरता व्यापार

0
भारत – चीन तनाव के बीच दोनो देशों के बीच कुलांचे मरता व्यापार

गजब है देश की व्यापार और विदेश नीति. दुश्मन देश के साथ आखिर हम व्यापार क्यों कर रहे हैं ? क्या इस व्यापार में भारत को कोई लाभ है ? सच तो ये है कि इस व्यापार में हम चीन से पीछे है और चीन हमे खोखला करते जा रहा है. भारत की आत्मनिर्भर योजना को झटका लग रहा है. प्रधानमंत्री मोदी इस पर कोई जवाब देंगे ?

भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव हो, भारतीय सेना के जवान सरहद पर चीनी सैनिकों का मुकाबला कर रहे हों और संसद में सरकार और विपक्ष चीन के मुद्दे पर आमने-सामने हों, फिर भी दोनों देशों के बीच आपसी व्यापार नई ऊंचाइयां छूता रहे, तो आप इसे क्या कहेंगे ? वो भी ऐसी सरकार के कार्यकाल में, जिसके मुखिया यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार आत्मनिर्भर भारत की बात करते हों! जाहिर है, ये दोनों तस्वीरें एक-दूसरे से बिलकुल अलग नजर आती हैं. ऐसे हालात आपको भले ही चौंकाते हों, लेकिन आंकड़े तो फिलहाल कुछ ऐसी ही कहानी बयान कर रहे हैं.

ब्लूमबर्ग की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक चीन से भारत का इंपोर्ट जितनी तेजी से बढ़ा है, उसके मुकाबले भारत से चीन को किए जाने वाले एक्सपोर्ट में वृद्धि की रफ्तार काफी कम है. यही वजह है कि मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती 7 महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर 2022 के दौरान चीन के साथ कारोबार में भारत को होने वाला व्यापार घाटा 51.50 अरब डॉलर पर जा पहुंचा है. इसके मुकाबले मार्च 2022 में खत्म पूरे वित्त वर्ष के दौरान चीन से कारोबार में भारत का व्यापार घाटा 73.31 अरब डॉलर रहा था.

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक ये तमाम आंकड़े भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय द्वारा संसद में दिए गए हैं. यही वजह है कि इस रिपोर्ट में इन आंकड़ों को रखते हुए इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत की पहल और चीन पर हमारी निर्भरता घटाने और उसके के सस्ते इंपोर्ट से घरेलू उद्योगों की बचाने की कोशिशों के लिए एक झटका बताया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2022 में खत्म 12 महीनों के दौरान चीन और भारत के बीच कुल मर्चेंडाइज़ ट्रेड 34 फीसदी बढ़कर 115.83 अरब अमेरिकी डॉलर पर जा पहुंचा. इतना ही नहीं, उसके बाद के सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर 2022 के दौरान भी चीन और भारत के बीच 69.04 करोड़ अमेरिकी डॉलर का मर्चेंडाइज़ ट्रेड हो चुका है.

भारत और चीन के बीच इतने बड़े पैमाने पर आपसी व्यापार होना इसलिए चिंता की बात है, क्योंकि पिछले कुछ बरसों के दौरान मोदी सरकार चीन पर भारत की निर्भरता कम करने की लगातार कोशिश करती रही है. 2020 में भारत सरकार ने चीन के साथ सीमा विवाद में भारतीय जवानों की शहादत के बाद उसके साथ व्यापार और कारोबार पर कई पाबंदियां भी लगाई थीं, लेकिन आंकड़े बता रहे हैं कि इन पाबंदियों के बावजूद चीन अब भी भारत में होने वाले इंपोर्ट का सबसे बड़ा सोर्स बना हुआ है.

Previous article बिहार में शराबबंदी के बीच छपरा में 30 लोगों की मौत पर राजनीतिक उफान 
Next article अफगान – पाक ‘चमन’ बॉर्डर पर तालिबान फोर्सेज़ फिर गोलाबारी, एक व्यक्ति की मौत 15 पाक नागरिक घायल
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here