Sunday, February 25, 2024
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पीके के फॉर्मूले पर यूपी कांग्रेस में बड़े बदलाव की तैयारी

अखिलेश अखिल

यह बात और है कि प्रशांत किशोर कांग्रेस में शामिल नहीं हो पाए लेकिन जाते – जाते उन्होंने कांग्रेस पर जो फॉर्मूला दिया है, अब कांग्रेस उस पर अमल करती नजर आ रही है. कांग्रेस का सबसे ज्यादा फोकस यूपी पर है और पार्टी को लग रहा है कि यूपी में संगठन मजबूत नहीं हो पाया तो आने वाले चुनाव में पार्टी की परेशानी और भी बढ़ जाएगी. ऐसे में पार्टी अब पीके के दिए गए फॉर्मूले पर ही आगे बढ़ने को तैयार है. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब एक्शन मोड में नजर आती दिख रही है. उन्होंने सभी पार्टी सचिवों और वरिष्ठ नेताओं से गंभीर डिस्कशन के बाद यूपी में अध्यक्ष पद की नियुक्ति के लिए ‘2 फॉर्मूले’ निकाले है. इन फॉर्मूलों से साफ है कि कांग्रेस परंपरागत पार्टी ढांचे की ओवरहालिंग करने के मूड में हैं.
बैठक में गहन मंथन के बाद अध्यक्ष पद की रीस्ट्रक्चरिंग के लिए निकला फॉर्मूला इस बात का संकेत है कि कांग्रेस और पीके के जुड़ाव के आड़े भले ही कुछ शर्तें आ गई हों, लेकिन पीके की मुफ्त सलाह को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने गंभीरता से लियाहै. बैठक के अंत में पार्टी दो नामों को लेकर गंभीर दिखी, पहला नाम दलित तो दूसरा ब्राह्मण नेता का है.
फॉर्मूला नंबर 1- प्रदेश को चार जोन में बांटकर चारों के अलग-अलग अध्यक्ष बनाए जाएं ताकि पूरे प्रदेश पर कांग्रेस बेहतर पकड़ बना सके. इससे हर जोन में बूथ लेवल तक के कार्यकर्ताओं से मेल जोल बढ़ाने में आसानी होगी. पीके ने भी बूथ लेवल तक कांग्रेस को अपनी पकड़ बनाने की सलाह दी थी.
फॉर्मूला नंबर 2- पार्टी का एक प्रदेश अध्यक्ष हो, जिसके नीचे चारों जोन के 4 कार्यकारी अध्यक्ष हों. इससे एक हाइरारकी मेंटेन करने और निगरानी व्यवस्था के मैनेजमेंट को और बेहतर किया जा सकेगा. चारों कार्यकारी अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष को और प्रदेश अध्यक्ष टॉप लीडरशिप को रिपोर्ट करेगा. इसके अलावा एक धड़ा, जो पुरानी व्यवस्था यानी एक ही प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के पक्ष में था, लेकिन सूत्रों की मानें तो फॉर्मूला नंबर-2 के पक्ष में पार्टी महासचिव और वरिष्ठ नेता करीब-करीब सहमत हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती बूथ लेवल तक पहुंच बनाने और सभी वर्गों को साधने की है. प्रदेश के आकार को देखते हुए अगर प्रदेश अध्यक्ष 4 और कार्यकारी अध्यक्षों के साथ मिलकर काम करेगा तो जनता के बीच पहुंच बनाने और हर जोन से फीडबैक लेने में आसानी होगी. दूसरा… पार्टी इस तरह से सभी वर्गों के लोगों को साध पाएगी. प्रदेश अध्यक्ष के तहत 4 अध्यक्ष अगर होंगे तो इसमें 5 वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जा सकेगा.
मंथन के बाद 1 दलित, दो ब्राह्मण, 3 मुस्लिम और दो जनरल समुदाय के नेताओं के नाम सामने आए. हालांकि, आखिर में एक दलित और दूसरे ब्राह्मण नेता पर गंभीर मंथन किया जा रहा है. हालांकि अध्यक्ष किसे बनाया जाय अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ है लेकिन आठ नामों पर चर्चा तेज है. ये आठ नाम हैं पीएल पुनिया, नसीमुद्दीन सिद्धकी, प्रमोद तिवारी, आचार्य प्रमोद कृष्णम, वीरेंदर चौधरी, नदीम जावेद, निर्मल खत्री और सलमान खुर्शीद.
सूत्रों की माने तो पीएल पुनिया और प्रमोद तिवारी के नाम को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है. तीसरा नाम राहुल गांधी के करीबी नदीम जावेद का भी है. लेकिन पार्टी मुस्लिम अपीजमेंट करते हुए नहीं दिखना चाहती. लिहाजा किसी हिंदू चेहरे को ही वह लाना चाहती है. सूत्रों की मानें तो पद के लिए दलित चेहरे पर आखिरी मुहर लग सकती है. लेकिन इन्हीं 8 नामों से 4 जोनों की आबादी के आधार पर 4 कार्यकारी अध्यक्ष भी चुने जा सकते हैं. एक जोन के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नदीम को जगह मिलने की पूरी उम्मीद है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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