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दस जनपथ से दस राजा जी मार्ग शिफ्ट हुआ कांग्रेस का शक्ति केंद्र

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दस जनपथ से दस राजा जी मार्ग शिफ्ट हुआ कांग्रेस का शक्ति केंद्र

अखिलेश अखिल

मल्लिकार्जुन खड़गे आखिर कांग्रेस अध्यक्ष बन ही गए. अब कांग्रेस का शक्ति केंद्र दस जनपथ से दस राजाजी मार्ग शिफ्ट कर गया. खड़गे का कांग्रेस अध्यक्ष बनना कोई मामूली बात नही है. जिस गांधी परिवार के बिना कांग्रेस की कल्पना नहीं की जा सकती थी,वही गांधी परिवार अब खड़गे के फैसले का इंतजार करेगा. कहने के लिए विपक्ष कुछ भी कहे, लेकिन सच यही है कि 21 वी सदी में कांग्रेस पूरी तरह से ट्रांसफॉर्मेशन के दौर में है. अगर यह बदलाव कारगर रहा तो पार्टी को संजीवनी मिलेगी.


कांग्रेस का कभी शक्ति केंद्र रहा दस जनपथ अब दस राजा जी मार्ग हो गया है. राजा जी मार्ग पार्टी के नए अध्यक्ष बने खड़गे का निवास स्थान है. खड़गे की जीत का जैसे ही ऐलान हुआ. पहले पार्टी मुख्यालय 24 अकबर रोड पर ढोल नगाड़े की दुदुम्भी हुई फिर दस जनपथ सोनिया गांधी के आवास पर भी जयकारे लगे. उधर राजा जी मार्ग पर भी पार्टी कार्यकर्ताओं के नारे लगे. पार्टी नेताओं और कांग्रेस जनो से राजा जी मार्ग अटा पड़ा था.
नए पार्टी अध्यक्ष खड़गे ने दस जनपथ से मिलने का आग्रह किया. खड़गे चाहते थे कि इस जीत के लिए सोनिया जी का शुक्रिया अदा करें. लेकिन दस जनपथ ने उनके आग्रह को टाल दिया. दरवाजे बंद हो गए. जैसे ही ये खबर सामने आई 24 अकबर रोड से लेकर दस राजा को मार्ग तक के लोग डर गए. कानाफूसी होने लगी. खड़गे भी थोड़ी देर के लिए आवक हो गए.
लेकिन सोनिया गांधी ने कुछ और ही योजना बना रखी थी. सरप्राईज देते हुए सोनिया और प्रियंका सीधे दस राजा जी मार्ग पहुंच गए. हाथ में गुलदस्ता और चेहरे पर मुस्कान लिए. खड़गे और सोनिया सामने सामने थे. खड़गे ने जीत के लिए सोनिया गांधी का शुक्रिया अदा किया, तो सोनिया गांधी और प्रियंका ने बधाइयां दी. फिर नारे लगे. दस राजा जी मार्ग मुस्कुरा उठा. शक्ति केंद्र का यह बदलाव ओरिजनल था. इसमें कोई हिडेन एजेंडा नही था.


उधर भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गांधी ने भी नए अध्यक्ष बने खड़गे को बधाई दी और यह भी कहा कि अब खड़गे साहब उनके लिए को भूमिका तय करेंगे, उसी राह पर वो चलेंगे. सब कुछ पलक झपकते साफ हो गया. कल तो लोग यह कह रहे थे कि अध्यक्ष चाहे जो भी बने अंतिम फैसला तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी का ही होगा. अब इस पर विराम सा लग गया है. बता दें कि बहुत सारे लोग यह मानकर चल रहे थे कि खड़गे की जीत के बाद थरूर कोई बड़ा खुलासा करेंगे. लेकिन थरूर ने तो वोटों की गिनती के समय ही खड़गे को बधाई दे दी और उन्हें अपना समर्थन भी दे दिया. उन्होंने साफ किया कि खड़गे पार्टी को गति देंगे और पार्टी को मजबूत भी.
पार्टी दफ्तर 24 अकबर रोड का नजारा भी बदल गया. खड़गे के नाम अध्यक्ष वाली पट्टिका भी लग गई. उनका अमला भी तैयार हो गया. कहा जा रहा है कि खड़गे दिल्ली में हर रोज पार्टी नेताओं से मिलेंगे और पार्टी संगठन को मजबूत करेंगे.


अब दस राजा जी मार्ग से कांग्रेसियों को अपेक्षा ज्यादा बढ़ गई है. खड़गे के सामने चुनौतियों की लंबी सूची है. एक तरफ जहां गुजरात, हिमाचल चुनाव में पार्टी को जीतने की चुनौती है तो वहीं अगले साल मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, कर्नाटक समेत करीब दस राज्यों में चुनाव होने हैं. कई राज्यों में बीजेपी से सीधा मुकाबला है. खड़गे इन राज्यों के लिए पार्टी को कितना मजबूत बनाते है, और कितने राज्यों में जीत हासिल करते है. इस पर सबकी निगाहें टिकी है. फिर 2024 में होने वाले आम चुनाव में बीजेपी का सामना कैसे पार्टी करती है कांग्रेस. इसे भी देखना है.
खड़गे के सामने राज्यों के संगठनों को मजबूत करना है, साथ ही पार्टी छोड़ चुके नेताओं को वापस लाने के साथ ही नए लोगों को पार्टी से जोड़ना भी बड़ी चुनौती है. इसके साथ ही संभावित विपक्षी एकता में पार्टी की मजबूत भूमिका तैयार करने का भी गंभीर मसला है. इन सब से अलग पार्टी के प्रति लोगों में विश्वास पैदा करने की भी बड़ी चुनौती रहेगी.
आने वाले दिनों में खड़गे क्या करामात दिखा पाते हैं और किस तरह से बूढ़े और युवा नेताओं का संगम तैयार कर जीत वाली राजनीति करते है इसे देखना दिलचस्प रहेगा.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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