Saturday, April 13, 2024
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क्या उद्धव ठाकरे के पक्ष में तेजस्वी करेंगे बीएमसी चुनाव में प्रचार ?

राजनीति कब किस करवट बैठती है यह कौन जनता है ? जो कभी दुश्मन दिखता है, वही एक समय में दोस्त बनकर सामने आने लगता है. यही हालत मौजूदा राजनीति में देखने को मिल रही है. जो शिवसेना कभी बिहार और यूपी के लोगों के खिलाफ जहर उगलती थी, उत्तर भारतीयों पर हमले करने से बाज नहीं आती थी, अब वही शिवसेना बंटवारे के बाद उत्तर भारतियों के वोट के लिए परेशान है. हालिया आदित्य ठाकरे का पटना दौरा कुछ यही सब बयां कर रहा है. शिवसेना के युवा नेता आदित्य ठाकरे पटना जाकर राजद नेता तेजस्वी यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलने गए तो पटना से लेकर दिल्ली और मुंबई में राजनीति गरमा गई. अब कहा जा रहा है कि बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी याद आगामी बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए प्रचार कर सकते हैं.

यह अटकलें तब सामने आईं जब आदित्य ठाकरे ने बुधवार को पटना में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मुलाकात की और कई मुद्दों पर चर्चा की. ठाकरे के पटना पहुंचने के बाद, अटकलें लगाई गईं कि वह 2024 के लोकसभा चुनावों में विपक्षी एकता या गठबंधन पर बात करेंगे लेकिन वो बीएमसी चुनावों के बारे में अधिक चिंतित दिखे. अब समझिए आखिर इस बार उद्धव गुट को तेजस्वी और नीतीश कुमार की शरण में क्यों आना पड़ा. तो जान लीजिए सारा खेल वोट बैंक का है.

महाराष्ट्र में शिवसेना के निशाने पर अक्सर उत्तर भारतीय लोग रहे हैं. शिवसेना नेता कई बार बिहार और यूपी के छात्रों की पिटाई तो कई बार मजदूरों की पिटाई में शामिल रहे हैं. ऐसे में कहा जाए तो शिवसेना की छवि उत्तर भारतीय विरोधी बन गई है. लेकिन इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन नहीं होने और शिंदे गुट के अलग हो जाने से उद्धव ठाकरे को वोट बैंक खिसकने का डर सताने लगा है. ऐसे में उत्तर भारतीय वोट बैंक साधने के लिए तेजस्वी और नीतीश कुमार से बेहतर विकल्प फिलहाल नहीं हो सकता. ठाकरे गुट को उम्मीद है कि ये दोनों नेता अगर प्रचार करें तो कहीं न कहीं बिहार और यूपी के लोग उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं.

बता दें कि मुंबई में करीब 40 लाख उत्तर भारतीय वोटर हैं. यानी वो मतदाता जो यूपी या बिहार के रहने वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बीएमसी में कुल 227 वार्ड हैं और इनमें से 40 पर तो उत्तर भारतीय मतदाताओं की ज्यादा पैठ है. उद्धव गुट को लग रहा है कि अगर उत्तर भारत के नेता उनके पक्ष में प्रचार कर दे तो संभव है कि निगम चुनाव में उसकी हालत बेहतर हो सकती है. अब देखना है कि यह राजनीति कितनी रंग लाती है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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