Sunday, February 25, 2024
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क्या आप जानते हैं कांधल जडेजा को, गुजरात के पोरबंदर में जडेजा के सामने सब फेल

लेडी माफिया डॉन संतोकबेन सरमनभाई जडेजा के बेटे कांधल जडेजा ने दावा किया है कि गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने के लिए उनका नाम ही काफी है. कांधल जडेजा पोरबंदर जिले की कुटियाना सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार हैं. हाल ही में उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) से टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी.

शबाना आजमी की साल 1999 में आई फिल्म “गॉडमदर” संतोकबेन सरमनभाई जडेजा के जीवन पर आधारित थी. ‘लेडी डॉन’ 1990 से 1995 तक पोरबंदर की कुटियाना सीट से विधायक रह चुकी थीं. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उनके खिलाफ अपने पति सरमन मुंजा जडेजा के 14 हत्यारों की हत्या के अलावा, 500 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे.

उनके बेटे कांधल जडेजा अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कांधल जडेजा को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह एक राजनीतिक दल के टिकट पर लड़ रहे हैं, या एक निर्दलीय के रूप में क्योंकि उनके अनुसार वह जीतेंगे. क्योंकि लोग उनके काम को वोट देते हैं. जडेजा पहली बार 2012 में एनसीपी उम्मीदवार के रूप में कुटियाना विधानसभा सीट से जीते थे, जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कांग्रेस के साथ चुनावी गठबंधन था.

उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, जडेजा से जब यह पूछा गया कि लोग उन्हें डर से या प्यार से वोट देते हैं. इसपर जडेजा ने कहा कि “अगर आपने मुझसे 80-90 के दशक में यह पूछा होता, तो मैं कहता – डर से ,तब बैलेट पेपर पर मतदान होता था. “अब तो ईवीएम है. उन्होंने कहा कि मेरे काम के कारण लोग मुझे वोट देते हैं. यहां हर कोई मुझे जानता है क्योंकि मैंने अपना पूरा जीवन यहां बिताया है और यहां मेरा एक बड़ा परिवार है. यह मेरी मां का गांव है.

गुजरात में इस बार 182 सीटों के लिए दो चरणों में मतदान होने वाले हैं. 89 सीटों पर मतदान 1 दिसंबर को पहले चरण में होगा. बाकी 93 सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 5 दिसंबर को होना है. इस चुनाव के नतीजे 8 दिसंबर को आएंगे.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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