Sunday, February 25, 2024
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ज्ञानवापी मस्जिद के सर्वे पर भड़के ओवैसी, कानून का बताया उल्लंघन, बोले, एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता न खोले कोर्ट

अंज़रूल बारी

ओवैसी ने वाराणसी के सीनियर जज के सर्वे वाले फैसले पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि मस्जिद के सर्वे का फैसला एंटी मुस्लिम हिंसा का रास्ता खोलने वाला कदम है. एमआईएम प्रमुख ने कहा कि ये बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है कि निचली कोर्ट के द्वारा सुप्रीम कोर्ट की खुले आम अवहेलना हो रही है. उन्होंने कहा कि सर्वे का आदेश देकर निचली अदालत 1980 – 1990 के दशक की रथ यात्रा के दौरान हुए खून – खराबे और मुस्लिम विरोधी हिंसा का रास्ता खोल रही है.

बता दें कि शुक्रवार को जब सर्वे करने के लिए टीम यहां पहुंची तो दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी की गई थी. काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद में आज भी वीडियोग्राफी और सर्वेक्षण का काम होगा.

हालांकि अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के अधिवक्ता अभय नाथ यादव ने सर्वे करने आए एडवोकेट कमिश्नर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा ‘ज्ञानवापी परिसर में जबरन दरवाजा खुलवा कर वीडियोग्राफी कराई गई. उन्हें बताया कि अदालत का ऐसा कोई आदेश नहीं है कि आप बैरिकेडिंग के अंदर जाकर वीडियोग्राफी कराएं. मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया है कि सर्वे के दौरान मस्जिद की दीवार को उंगली से कुरेदा जा रहा था, जबकि ऐसा कोई आदेश कोर्ट ने नहीं दिया था.

बता दें कि 18 अगस्त 2021 को दिल्ली की पाँच महिलाओं ने वाराणसी की निचली अदालत में एक याचिका दाखिल की थी. इन महिलाओं का कहना था कि उन्हें मंदिर परिसर में दिख रही दूसरी देवी देवताओं का दर्शन, पूजा और भोग करने की इजाज़त होनी चाहिए. अपनी याचिका में इन महिलाओं ने अलग से अर्ज़ी देकर यह भी मांग रखी थी कि कोर्ट एक अधिवक्ता आयुक्त की नियुक्ति करे जो इन सभी देवी देवताओं की मूर्तियों के अस्तित्व को सुनिश्चित करे. जिसके बाद 8 अप्रैल 2022 को निचली अदालत ने परिसर का निरीक्षण करने और निरीक्षण की वीडियोग्राफी करने के आदेश दिए थे. जबकि 9 सितंबर 2021 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निचली अदालत के एएसआई द्वारा सर्वेक्षण पर रोक लगा दी गई थी.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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