आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान की मुसीबत बढ़ गई है. शुक्रवार देर शाम ऐंटी करप्शन ब्यूरो ने अमानतुल्लाह को गिरफ्तार कर लिया. इससे पहले दोपहर में अमानतुल्लाह को पूछताछ के लिए एसीबी ने अपने दफ्तर तलब किया था. एक तरफ एसीबी अधिकारी विधायक से पूछताछ कर रहे थे तो दूसरी ओर कुछ अधिकारी उनके अलग अलग ठिकानों पर छापेमारी कर जांच की. ये पूरी कार्रवाई वक्फ बोर्ड से जुड़े मामले में की गई है जो कि पहले हाई सॉल्व हो चुका है.
सूत्रों ने परिवार के हवाले से बताया जा रहा है कि रेड के दौरान अमानतुल्ला के ठिकाने से कुछ ना मिलने का दावा एसीबी और पुलिस अधिकारियों ने किया है. बावजूद इसके कुछ मीडिया संस्थानों के द्वारा जाँच से पहले ही विदेशी पिस्टल और कैश मिलने की बात से परिवार के लोग खासे नाराज हैं. उनका कहना है कि पिस्टल और कैश की बरामदगी का अमानतुल्लाह से कोई लेना देना नहीं है. परिवार के लोगों ने सवाल किया कि विधायक के किसी किसी जानकार के पास से किसी चीज का बरामद होना विधायक को कैसे आरोपी बना सकता है. बिजनेस पार्टनर हामिद अली के घर से मिली है. बता दें कि एसीबी की टीमों ने ओखला के जामिया, गफूर नगर और बतला हाउस में उनके घर समेत पांच ठिकानों पर छापे मारे थे.
विधायक की गिरफ्तारी और छापेमारी से नाराज़ घरवालों का कहना है कि एसीबी अधिकारी जबरन अचानक घर में घर में घुसे और पूरे घर को तेहस नहस करके रख दिया. कुछ ना मिलने पर भी पुलिस ने अमानतुल्लाखान को गिरफ़्तार कर लिया जिससे उनके परिवार वाले न सिर्फ नाराज़ हैं बल्कि ख़ासे परेशान भी हैं.
इस बीच विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा है कि जो रिकॉर्ड मांगे गए, वो मैंने दिए हैं वो अधिकारियों के हवाले कर दिए गए थे. विधायक ने कहा कि ये लोग (अधिकारी) कहते हैं ऊपर से प्रेशर है. कोई भी शिकायत डालता है. सीईओ वक्फ बोर्ड की शिकायत पर ऐसा हो रहा है. कॉन्ट्रैक्ट के लिए नहीं, पर्मानेंट स्टाफ के लिए नियुक्ति हुई थी. दंगों के समय मेरा पर्सनल अकाउंट, रिलीज अकाउंट नहीं बन सकता था. उन्होंने कहा कि मुझसे पहले 24 लोगों को भर्ती किया गया. सबको मेरिट बेस पर लिया गया. उसी सीईओ ने इन लोगों भी रखा, जिसने शिकायत की है. ये 2022 के रिकॉर्ड मांग रहे हैं जो हमने दे दिया. रिलीफ कमिटी 2020 में बनी, एफआईआर उससे पहले हो गई. ना मैंने किसी केस को प्रभावित किया ना कुछ गलत किया. मैंने सभी मानदंडों का पालन किया है. मेरे खिलाफ 23-24 एफआईआर हैं.
विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा- हर बार जब भी किसी अनजान व्यक्ति को शिकायत होती है तो ये लोग मुझे पूछताछ के लिए बुलाते हैं. मैंने 125 स्थायी कर्मचारियों के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन वह मंजूर नहीं हुआ. मुझे उस काम के लिए संविदा कर्मचारियों को काम पर रखना पड़ा जो मैंने मानदंडों के पालन के तहत किया था. भर्ती समिति ने योग्यता के आधार पर लोगों को नियुक्त किया था, यह नहीं कहा जा सकता कि मेरे रिश्तेदारों को वरीयता दी गई या नहीं.
दरअसल, अमानतुल्लाह खान पर वक्फ बोर्ड के बैंक खातों में ‘वित्तीय गड़बड़ी’, वक्फ बोर्ड की संपत्तियों में किरायेदारी का निर्माण, वाहनों की खरीद में ‘भ्रष्टाचार’ और दिल्ली वक्फ बोर्ड में सेवा नियमों में उल्लंघन करते हुए 33 लोगों की ‘अवैध नियुक्ति’ के आरोप हैं. इस संबंध में एसीबी ने जनवरी 2020 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया था.
खान पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग करने और अपने करीबियों की नियुक्तियां करने का भी आरोप लगा है. सीबीआई ने इसी साल मई में अमानतुल्लाह खान पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी.