Sunday, February 25, 2024
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राष्ट्रपति उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का आज नामांकन, देश को मिल सकता है पहला आदिवासी राष्ट्रपति

 

जिस तरह के राजनीतिक खेल चल रहे हैं उससे साफ़ लगता है कि एनडीए राष्ट्रपति उम्मीदवार और आदिवासी महिला नेता द्रौपदी मुर्मू का चुनाव में जीतना तय है. विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा के जीत की सम्भावना कमजोर होती जा रही है. झारखंड की पूर्व राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू आज दोपहर 12 बजे एनडीए की ओर से राष्ट्रपति पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगी. इस मौके पर पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे. 29 जून को पर्चा भरने की आखिरी तारीख है.
इससे पहले गुरुवार को द्रौपदी मुर्मू की पीएम मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात हुई. इसके बाद केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के घर पर राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नामांकन के लिए प्रस्तावक और समर्थक के तौर पर नॉमिनेशन पेपर पर हस्ताक्षर किए गए.
आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्‌डी ने गुरूवार को ऐलान किया है कि उनकी पार्टी राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन करेगी. सीएम जगन का मानना है कि मुर्मू का समर्थन करना एससी, एसटी, बीसी और अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधित्व पर हमेशा जोर देने की उनकी विचारधारा के अनुरूप है. जगन बिजी शेड्यूल के कारण मुर्मू द्वारा नामांकन दाखिल करने में शामिल नहीं हो पाएंगे. हालांकि, राज्यसभा सांसद विजय साई रेड्डी और लोकसभा सांसद मिधुन रेड्डी मौजूद रहेंगे.
मुर्मू के समर्थन में कई और दल भी सामने आये हैं. ओडिशा की बीजू जनता दल पहले ही मुर्मू के समर्थन की घोषणा कर चुकी है. मेघालय जनतांत्रिक गठबंधन (एमडीए) ने भी समर्थन करने की घोषणा की है. संघ के एक संगठन अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम ने द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनाए जाने के निर्णय को ऐतिहासिक करार दिया है.
आंध्र प्रदेश के सीएम जगनमोहन रेड्‌डी ने भी समर्थन का ऐलान किया है. सिक्किम के मुख्यमंत्री और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के अध्यक्ष प्रेम सिंह तमांग ने राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए द्रौपदी मुर्मू की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. बिहार की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा ने भी समर्थन करने की घोषणा की है. एलजेपी (रामविलास) भी मुर्मू के समर्थन की घोषणा कर चुकी है.
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा से आनेवाली आदिवासी नेता हैं. झारखंड की नौंवी राज्यपाल रह चुकीं द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के रायरंगपुर से विधायक रह चुकी हैं. वह पहली ओडिया नेता हैं जिन्हें राज्यपाल बनाया गया. इससे पहले बीजेपी – बीजेडी गठबंधन सरकार में साल 2002 से 2004 तक वह मंत्री भी रह चुकी हैं.
देश में अब तक आदिवासी समुदाय का कोई व्यक्ति राष्ट्रपति नहीं बन पाया है. महिला, दलित, मुस्लिम और दक्षिण भारत से आने वाले लोग राष्ट्रपति बन चुके हैं, लेकिन आदिवासी समुदाय इससे वंचित रहा है. ऐसे में यह मांग उठती रही है कि दलित समाज से भी किसी व्यक्ति को देश के सर्वोच्च पद पर बैठाया जाए.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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