Saturday, April 13, 2024
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यशवंत सिन्हा ने कहा, राष्ट्रपति भवन पहुंचा तो एनआरसी – सीएए कानून लागू नहीं होगा

 

देश में राष्ट्रपति चुनाव काफी मनोरंजक हो गया है. पहले राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले अधिकतर उम्मीदवार प्रायः मौन ही रहते थे, सरकार के काम काज पर कोई सवाल नहीं उठाते थे. लेकिन अब ऐसा नहीं रहा. विपक्ष के राष्ट्रपति कैंडिडेट यशवंत सिन्हा ने चुनाव प्रचार के दौरान बड़ा ऐलान किया है. बुधवार को असम दौरे पर पहुंचे सिन्हा ने कहा कि अगर मैं राष्ट्रपति भवन पहुंचा, तो मोदी सरकार का सीएए – एनआरसी कानून लागू नहीं होने दूंगा. सिन्हा ने आगे कहा कि देश में संविधान पर आक्रमण किया जा रहा है. संविधान को बाहरी ताकतों से नहीं बल्कि सत्ता में बैठे लोगों से खतरा है. इसे रोकने के लिए सबको आगे आना होगा. उन्होंने कहा कि मैं अंतिम सांस तक सीएए कानून के खिलाफ लड़ूंगा.

सीएए कानून को लेकर राष्ट्रपति कैंडिडेट सिन्हा ने कहा कि यह मूर्खतापूर्ण तरीके से लागू किया गया है. सरकार इसी वजह से लागू नहीं कर पा रही है और सिर्फ बहाना दे रही है. सिन्हा ने कहा कि असम और पूर्वोत्तर भारत के लिए यह एक अहम मुद्दा है और मुझे उम्मीद है सभी समझेंगे.

बता दें कि सीएए के तहत पाक, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण आए हिंदू, ईसाई, सिख, पारसी, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों को नागरिकता दी जाएगी. जो 31 दिसंबर 2014 से पहले आ गए हैं, उन्हें नागरिकता मिलेगी. नागरिकता पाने के लिए अब 11 साल रहने के नियम में भी ढील दी गई है.

पूर्वोत्तर में लोगों को लग रहा है कि शरणार्थियों को नागरिकता मिलने से उनकी अपनी संस्कृति और पहचान खत्म हो जाएगी. मुस्लिमों का कहना है कि सीएए में मुस्लिम शरणार्थियों को न जोड़ना भेदभाव है. और मुस्लिम इसे एनआरसी से जोड़कर देख रहे हैं. भय है कि एनआरसी हुई तो गैर-मुस्लिमों को नागरिकता मिलेगी. इन्हें परेशानी होगी. ऐसे में यशवंत सिन्हा के बयान को काफी महत्वपूर्ण मान जा रहा है.

बता दें कि किसी कानून के नियम 6 माह के भीतर प्रकाशित हो जाने चाहिए ताकि उस कानून पर अमल हो सके. सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट यानी सीएए संसद से 11 दिसम्बर, 2019 को पारित हुआ. अधिनियम 10 जनवरी 2020 को लागू हो गया. लेकिन इसके नियम तय नहीं किए गए. नियम तय करने के लिए केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2020, फरवरी 2021 और मई 2021 में संसद की सबोर्डिनेट लेजिसलेशन कमेटियों से एक्सटेंशन मांगे. हालांकि, इसी साल मई में गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया कि कोरोना खत्म होने के बाद लागू किया जाएगा.

उधर एक और सवाल के जबाव में सिन्हा ने कहा कि उद्धव ठाकरे शिवसेना को बचाने में जुटे हैं. इसलिए उन्होंने द्रौपदी मुर्मू को सपोर्ट किया है. ममता बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा कि उनका पूरा सपोर्ट है और वोटिंग के दिन सब दिख जाएगा.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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