Monday, December 11, 2023
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प्रपंची राजनीति को झूठ से शर्मसार करते नड्डा और शाह 

 

अखिलेश अखिल

 

राजनीति चरित्रहीन है या फिर नेता ? या फिर दोनों ? और उस जनता को आप किस श्रेणी में रखेंगे जो झूठी राजनीति और झूठे बयान पर भी तालियां बजाती है और जयकारा लगाती है ! ठगिनी राजनीति का यह खेल कोई नया नहीं है. यह तो सनातन काल से जारी है. लेकिन छुटभैये नेताओं की करतूत और दलाल राजनीति में तो यह सब चल जाता है, लेकिन जब किसी पार्टी के बड़े नेता और बड़े पदों पर विराजमान मंत्री अपनी झूठी तकरीर से देश को गुमराह करने लगे तो उसे कहेंगे ? ऐसा नहीं है कि कोई पहली बार किसी नेता ने झूठ बोलकर जनता को गुमराह किया है. ऐसा भी नहीं है कि केवल बीजेपी वाले ही झूठ की उल्टियां करते हैं. इस श्रेणी में कांग्रेस वाले, आप वाले, सपा वाले और बसपा वालों से लेकर देश की ऐसी कोई पार्टी नहीं है जो झूठ के सहारे अपनी राजनीति को चमकाते रहे हैं. लेकिन पिछले दिनों जिस अंदाज में बीजेपी अध्यक्ष जे पी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह तमिलनाडु और बिहार में झूठा दावा किया है, वह न केवल बीजेपी की राजनीति को कलंकित करता है बल्कि सरकार के इकबाल पर भी सवाल उठाता है.

ज़रा इस बयान पर गौर करे. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बीते 22 सितंबर को तमिलनाडु के मदुरै में केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा था कि ‘मदुरै में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान स्थापना से जुड़ा 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है और प्रधानमंत्री जल्द ही इसे जनता को समर्पित कर देंगे. उन्होंने आगे कहा था कि एम्स परियोजना के लिए 1,264 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, इसके अलावा 164 करोड़ रुपये अतरिक्त दिए गए हैं, ताकि संक्रामक रोग ब्लॉक स्थापित किया जा सके. द हिंदू के मुताबिक, उन्होंने साथ ही कहा था कि एम्स में एमबीबीएस की सीटों की संख्या भी 100 से बढ़ाकर 250 कर दी गई है.

बता दें कि यह सभी दावे उन्होंने मदुरै में उद्योगपतियों के साथ हुई बैठक में किए थे. इसके बाद एम्स निर्माण संबंधी उनके इन दावों पर विपक्षी सांसदों ने गंभीर सवाल उठाए हैं.

नड्डा के दावों के अगले ही दिन विरुधुनगर से कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर और मदुरै सांसद एस. वेंकटेशन ने एम्स की साइट का निरीक्षण किया और पाया कि वहां 95 फीसदी निर्मित एम्स तो दूर, एम्स का ढांचा तक नहीं है और यहां तक कि कोई बोर्ड तक नहीं लगा है. जो यह बताता हो कि उक्त ज़मीन एम्स की है. उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि पहले यहां लगाया गया वह बोर्ड जिसमें दावा किया गया था कि यह ज़मीन एम्स मदुरै की है, वो भी गायब है. उन्होंने कहा, ‘इस विशाल भूमि पर किसी भी निर्माण कार्य के जल्द शुरू होने के कोई संकेत नहीं हैं.

नड्डा के दावों का खंडन करते हुए वेंकटेशन ने कहा, ‘मार्च 2021 में 1977 करोड़ रुपये का संशोधित अनुमान आदेश जारी हुआ था. हालांकि, इसके लिए कैबिनेट की मंजूरी अभी दी जानी बाकी है. उन्होंने कहा, ‘मुझे आश्चर्य है कि कैसे पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरह का दावा किया, जबकि टेंडर ही जारी नहीं किए गए हैं. मनिकम ने नड्डा को संबोधित करते हुए ट्वीट में लिखा, ‘धन्यवाद मदुरौ एम्स को 95 फीसदी पूरा करने के लिए. मैं और मदुरै सांसद वेंकटेशन एक घंटे तक थोप्पुर साइट पर एक घंटे तक इसे खोजते रहे और कुछ नहीं मिला. किसी ने इमारत को चुरा लिया है. उन्होंने ट्वीट के साथ साइट के फोटो भी डाले हैं जिनमें सपाट मैदान के अलावा और कुछ नजर नहीं आ रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी की तमिलनाडु इकाई ने एक ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को गुमराह किया, जिसके लिए दक्षिणी जिलों के लोग पिछले पांच सालों से लड़ रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने मदुरै के लोगों को धोखा दिया है.

वहीं, सांसद वेंकटेशन ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने एम्स मदुरै की साइट का यह देखने के लिए निरीक्षण किया कि ‘बुलबुल’ का इस्तेमाल करते हुए कैसे इमारत का निर्माण हुआ है. जब नड्डा के बयान पर विपक्ष का वार शुरू हुआ तो इस बयान को लीपा पोती करने बीजेपी के दूसरे नेता सामने आये. तमिलनाडु के बीजेपी उपाध्यक्ष नारायण तिरुपति ने एक ट्वीट में कहा, ‘उनका (नड्डा) कहना था कि निर्माण शुरू करने की दिशा में 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है और साथ ही कहा था कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा.

ऐसे में क्या नड्डा के बयान को कोई गंभीरता से आगे लेगा ? इस बयान के बाद नड्डा क्या सोंचते हैं. यह तो वही जाने, लेकिन यह साफ़ हो गया है कि जनता के बीच अब उनका वह इकबाल नहीं रहा जो होता था. ठगिनी राजनीति का इससे बड़ा उदहारण और क्या होगा !

उधर नड्डा की तर्ज पर ही गृह मंत्री अमित शाह बिहार के पूर्णिया में बहुत कुछ बोल गए. बीजेपी से नीतीश के अलग होने से तमतमाए शाह बिहार सीमांचल इलाके में अपनी नयी जमीन तलाशने और जदयू – राजद गठबंधन को सबक सिखाने पहुंचे थे. उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार से अलग होने के बाद बीजेपी ने पूर्णिया और किशनगंज यानि सीमांचल से महागठबंधन सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया. इस दौरान अमित शाह ने नीतीश कुमार और लालू यादव दोनों पर ही हमला बोला. उन्होंने कहा कि अब यहाँ बीजेपी की मोदी सरकार हवाई अड्डा बना रही है. यहाँ के लोगों को दिल्ली और मुंबई पहुँचने में कोई देरी नहीं होगी. हवाई अड्डा बनकर लगभग तैयार है और जल्द ही इसका शिलान्यास होगा.

लेकिन इसके बाद जो होना चाहिए था, वही हुआ. बदले में जदयू और आरजेडी ने पलटवार शुरू कर दिया. जदयू संसदीय दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने तो बीजेपी को बड़का झुट्ठा पार्टी तक कहा. लेकिन असली हमला जदयू अध्यक्ष ललन सिंह ने किया. ललन सिंह ने ट्वीट कर अमित शाह पर हमला बोला. ललन सिंह ने ट्वीट किया कि ‘गृहमंत्री जी, पूर्णिया हवाई अड्डा कब बन गया, बताइए तो जरा ? कृपया हमारा ज्ञानवर्धन कीजिए. कम से कम अब तो बिहार के लोगों को ठगना बंद कीजिए. सोचिए जिस देश का गृहमंत्री ही जुमलेबाज हो, उस देश का भविष्य क्या होगा ? अब तो भाजपा मुक्त देश ही एक मात्र विकल्प है.’

राजद ने भी इसी मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री पर हमला बोला. राजद ने ट्वीट किया कि ‘पूर्णिया में बिना हवाई अड्डा बने ही अमित शाह ने जहाज उड़ा दिए. इतिहास से छेड़छाड़ करने वाले गुजरात के अमित शाह जी नहीं जानते कि 89 वर्ष पूर्व अंग्रेजों ने 1933 में एवरेस्ट के लिए पहली उड़ान पूर्णिया से ही भरी थी. गृहमंत्री इतनी सफेद झूठ बोलने की हिम्मत कहाँ से जुटाते है?’

सवाल है कि जब झूठ पकड़ा जाता है तो नेता अपनी गलती क्यों नहीं मानते. लेकिन सबसे बड़ा सच तो यही है कि राजनीति करने वाले कभी अपनी गलती नहीं मानते. क्या किसी नेता में भ्रष्टाचार करने के बाद भी पाना दोष स्वीकारते हैं ? हरगिज नहीं. कहते फिरते हैं कि राजनीतिक वजहों से उन्हें फसाया गया है. राजनीति झूठ और प्रपंच का ही दूसरा नाम है. जो जितना बड़ा झूठा वह उतना सफल नेता. अब तक इस देश में तो यही देखा गया है.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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