Sunday, February 25, 2024
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जन्मशती समारोह पर याद किए गए मधु लिमये और दंडवते

हैदराबाद: लोहिया विचार मंच, हैदराबाद द्वारा बीते रविवार को आबिद्स स्थित केमिस्ट भवन में प्रख्यात समाजवादी चिंतक व राजनेता प्रो. मधु दंडवते और मधु लिमये की जन्मशती समारोह आयोजित की गई.

कार्यक्रम में राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेश खैरनार, वरिष्ठ समाजवादी नेता अरुण श्रीवास्तव, पूर्व एमएलसी यादव रेड्डी और डॉ. राममनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष अभिषेक रंजन सिंह ने मुख्य रूप से अपने विचार प्रकट किए.

कार्यक्रम की शुरूआत डॉ. लोहिया के उत्तर-पूर्व में नागरिक आजादी पर केंद्रित लघु फिल्म उर्वशीयम की स्क्रीनिंग से हुई.

स्वागत भाषण लोहिया विचार मंच, हैदराबाद के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश टी. गोपाल सिंह ने दिया. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि लोहिया विचार मंच समय-समय पर अपने समाजवादी पुरखों की स्मृति में परिसंवाद एवं संगोष्ठी का आयोजन करता है, ताकि देश की युवा पीढ़ी लोहिया सहित उनके समकालीन सोशलिस्ट नेताओं के राजनीतिक योगदानों से परिचित हो सकें. टीजी सिंह ने मधु लिमये के साथ अपने संस्मरण को याद करते हुए कहा कि मन, कर्म और वचन के पक्के ऐसे राजनेता मौजूदा समय में नहीं है.

इस दौरान डॉ. राममनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष अभिषेक रंजन सिंह ने हैदराबाद को समाजवादियों की कर्मभूमि बताया. उनके मुताबिक, समाजवादी राजनीति आज हाशिए पर है, और इसके लिए कोई और नहीं, बल्कि समाजवादी नेता जिम्मेदार हैं. देश की नई पीढ़ियों से वर्तमान समय के समाजवादी दल पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके हैं. यही वजह है कि छात्र-नौजवानों का इनसे मोहभंग हो चुका है.

अभिषेक रंजन ने बताया कि ना-उम्मीदी के इस दौर में भी थोड़ी-बहुत संभावनाएं बची हैं, क्योंकि जिस प्रकार मिट्टी में कोई बीज वर्षों से दबा रहता है और अनुकूल वातावरण मिलने पर उसके अंकुर फूटते हैं.

वरिष्ठ समाजवादी नेता अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि प्रो. मधु दंडवते ने सदैव शुचिता की राजनीति की. यह साल उनके जन्मशती का साल है. लिहाजा देश भर में उनकी स्मृति में पचास से अधिक कार्यक्रम किए जाएंगे, और उनपर केंद्रित एक स्मारिका भी प्रकाशित की जाएगी.

राष्ट्र सेवा दल के पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुरेश खैरनार ने मधु लिमये और प्रो. मधु दंडवते को याद करते हुए कहा कि आज देश की मौजूदा स्थिति पर वो दोनों राजनेता खामोश नहीं बैठते, लेकिन आज कहीं से भी प्रतिरोध के स्वर प्रभावी नहीं हो रहे. समाजवादी नेता और पूर्व एमएलसी यादव रेड्डी ने कहा कि वर्तमान समय देश की जो स्थिति है, उस पर विपक्षी एकता बेहद जरूरी है. यह कोई प्रयोग नहीं, बल्कि समय की मांग है. तभी देश और संविधान बचेगा.

जन्मशती समारोह में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की नेता सुभद्रा रेड्डी, जनता दल सेकुलर नेता पी.जे सूरी, रामदास, बालकिशन राव, शंकरलाल यादव, घनश्याम यादव, अतुल कुमार एवं प्रत्युष कुमार सिंह आदि उपस्थित थे, और अपने विचार रखे. धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक दामोदर रेड्डी (एडवोकेट) ने किया.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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