Sunday, February 25, 2024
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गुजरात चुनाव : गृह मंत्री शाह ने गुजरात दंगों की याद दिलाई और कहा अब शांति है —-

गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान खेड़ा की एक रैली में कहा- 1995 से पहले जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, तब असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद थे. 2002 में हमने उन्हें ऐसा सबक सिखाया कि वो हिंसा करना भूल गए. इसके बाद बीजेपी ने पूरे गुजरात में स्थायी शांति ला दी.

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शाह ने कहा- गुजरात में सांप्रदायिक दंगों को भड़काने का काम कांग्रेस ने किया. मैं आज भरूच जिला में हूं. मैंने यहां बहुत दंगे देखे हैं. 2002 में इन्होंने हिंसा करने की हिम्मत की थी, इनको ऐसा पाठ पढ़ाया, चुन-चुन कर सीधा किया. जेल में डाला तो उसके बाद से 22 साल हो गए, कहीं कर्फ्यू नहीं लगाना पड़ा.

शाह ने आगे कहा कि कांग्रेस राज्य में दंगे करवाकर अलग-अलग समुदाय और जाति के लोगों को एक-दूसरे से लड़ने के लिए भड़काती थी. कांग्रेस अपने वोट बैंक के लिए लोगों को हिंसा करने के लिए शह दिया करती थी. कांग्रेस ने सिर्फ अपने वोट बैंक को मजबूत किया और समाज के एक बड़े वर्ग के साथ अन्याय किया.

शाह ने कहा- अपराधियों को कांग्रेस से लंबे समय तक समर्थन मिलने के कारण हिंसा करने की आदत हो गई थी. गुजरात में जब कांग्रेस का शासन था तो यहां इज्जू शेख, पीरजादा और लतीफ जैसे दादा हुआ करते थे, लेकिन आज गुजरात के गांवों में अगर कोई एक दादा है तो वो हैं ‘हनुमान दादा’. बाकी कोई नहीं.

शाह ने जम्मू कश्मीर के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने वोट बैंक की वजह से कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के खिलाफ थी, लेकिन पीएम मोदी ने वोट बैंक के लिए नहीं, बल्कि देश की भलाई के लिए 370 अनुच्छेद को निरस्त किया.

अमित शाह ने आगे कहा- कांग्रेस ने अनुच्छेद 370 की तरह सालों तक राम मंदिर के मुद्दे को उलझाए रखा. कभी सेशन कोर्ट में, कभी हाईकोर्ट में और कभी सुप्रीम कोर्ट में. जब मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो राम जन्मभूमि का भूमिपूजन बिना खून की एक बूंद बहाए किया गया.

राहुल बाबा मुझे ताना मारते थे कि मंदिर वहीं बनाएंगे तिथि नहीं बताएंगे. अब मैं आपको बताता हूं कि अगर आप 1 जनवरी 2024 का टिकट बुक कराते हैं तो वहां गगनचुंबी राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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