Saturday, March 25, 2023
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क्या यूपी के फूलपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे नीतीश कुमार !

 

बीजेपी से जदयू के हटने और बिहार में फिर से नया गठबंधन बनने के बाद विपक्षी एकता की जो मुहिम बिहार के सीएम नीतीश कुमार चला रहे हैं. उससे बीजेपी की परेशानी अब बढ़ती जा रही है. यह बात और है कि बीजेपी के विस्तार और विशाल मजबूत संगठन के सामने अभी विपक्ष छितराया हुआ है, लेकिन अगर इसमें एकजुटता हो गई तो बीजेपी को अगले चुनाव में कड़ी टक्कर मिल सकती है. आगे का अंजाम क्या होगा इसे तो अभी देखना है. लेकिन जिस तरह से यूपी के फूलपुर सीट को लेकर जदयू की तैयारी चल रही है, उसके बहुत सारे मायने हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले यूपी का फूलपुर लोकसभा क्षेत्र चर्चा में है. देश के दो पूर्व पीएम की कर्म भूमि रही फूलपुर इस दफा बिहार में सियासी हलचल बढ़ा दी है. दरअसल, जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने दो दिन पहले कहा था कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार यूपी के फुलपुर से चुनाव लड़ सकते हैं. उनसे यह संकेत मिलते ही बिहार में सियासी हलचल तेज हो गई. बीजेपी नेता सुशील मोदी ने तो नीतीश कुमार को ओपन चैलेंज देते हुए कहा कि नीतीश जी चाहे फूलपुर जाएं या मिर्जापुर,आपकी जमानत तक नहीं बचेगी.

बिहार के सीएम नीतीश कुमार आखिर बिहार छोड़कर यूपी से क्यों चुनाव लड़ना चाह रहे हैं. इसपर उनके समर्थकों का कहना है कि पीएम की कुर्सी यूपी होकर जाती है. इसलिए नीतीश कुमार ने भी यूपी से चुनाव लड़ने का मन बनाया है. इसके साथ ही यूपी में 80 लोकसभा की सीटें हैं, जोकि पूरे देश में सबसे ज्यादा हैं. इसलिए पीएम पद के उम्मीदवारों की पहली पसंद यूपी से ही चुनाव लड़ना होता है. यहां से हिंदी पट्टी साधने की कोशिश की जाती है. जाति को लेकर अगर बात करें तो फूलपुर एक कुर्मी बाहुल्य सीट है. यहां पर करीब तीन लाख कुर्मी वोटर हैं. खुद नीतीश कुमार कुर्मी समाज से आते हैं. इस सीट से आठ सांसद कुर्मी समाज से चुने गए हैं. इस सीट पर बीजेपी की स्थिति कमजोर मानी जाती है. अब तक सिर्फ दो बार चुनाव ही बीजेपी जीत पाई है. साथ ही फूलपुर बिहार के काफी करीब है, इसलिए यहां से पूर्वांचल के साथ-साथ बिहार को साधा जा सकता है.

फूलपुर संसदीय क्षेत्र पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से नजदीक है. कहा जा रहा है नीतीश कुमार यहां से पीएम नरेंद्र मोदी के समर्थक की ओर से बार बार किए जा रहे मोदी नहीं तो कौन? का भी जवाब देंगे और पीएम नरेंद्र मोदी को सीधी चुनौती देते नजर आएंगे. चुनाव में जनता के बीच दोनों नेताओं के आमने-सामने होने जैसा आभास होता रहेगा.

फूलपुर सीट पूर्वांचल में पड़ता है. जोकि बिहार के करीब है, और फूलपुर ने देश को दो प्रधानमंत्री भी दिये हैं. देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू इसी सीट से सांसद रहे, वो लगातार तीन बार सांसद रहे और देश के पीएम चुने गए. 1964 में उनके निधन के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित इस सीट से चुनाव लड़ी और वो भी जीती. 1967 में समाजवादी नेता जनेश्वर मिश्र ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वो चुनाव हार गए. इस सीट पर फिर से जनता ने विजय लक्ष्मी पंडित को ही चुना. 1971 में विश्वनाथ प्रताप सिंह भी फूलपुर सीट से सांसद बन कर लोकसभा पहुंचे और आगे चलकर वो भी देश के प्रधानमंत्री बने. वहीं डॉ. राम मनोहर लोहिया का नाम भी इस सीट से जुड़ा है.

खास बात ये है कि 1962 में राम मनोहर लोहिया, जवाहर लाल नेहरू के खिलाफ चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. यहां से यूपी के सीएम हेमवती नंदन बहुगुणा की पत्नी कमला बहुगुणा सांसद बनीं. यहां से दो बाहुबली भी संसद पहुंच चुके हैं. बाहुबली नेता अतीक अहमद 2004 में और 2009 में कपिल मुनि करवरिया यहां से सांसद रहे हैं. यूपी बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य 2014 में यहां से लोकसभा पहुंच चुके हैं. ऐसे में यह सीट अब काफी अहम् है. नीतीश कुमार यहां से चुनाव लड़ते हैं तो खेल दिलचस्प हो सकता है. हालांकि अभी चुनाव में करीब दो साल है. लेकिन जिस तरह से घेराबंदी जारी है. ऐसे में बीजेपी की राह पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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