Sunday, February 25, 2024
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क्या यूक्रेन युद्ध खत्म होने की तरफ बढ़ रहा है ?

महीनों से चले आ रहे युद्ध के बाद क्या रूस थकने लगा है? क्या पुतिन की सेना युद्ध हार रही है ? या फिर सबसे अहम सवाल, क्या यूक्रेन युद्ध खत्म होने की तरफ बढ़ रहा है ? इस बारे में पक्का तो कुछ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन इसके संकेत मिलने लगे हैं. पिछले दिनों रूस ने अपनी सेना को यूक्रेन के सबसे बड़े शहर खेरसॉन से पीछे हटने का आदेश दिया. खुद रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि रूस ने सैनिकों को दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन शहर से हटने का आदेश दिया है. आपको बता दें कि खेरसान क्षेत्र यूक्रेन के चार प्रांतों में से एक है. जिसे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अवैध रूप से कब्जा लिया और बाद में वहां रूसी मार्शल लॉ लागू कर दिया है.

शोइगु ने यूक्रेन में रूस के कमांडर सर्गेई सुरोविकिन के साथ एक बैठक के दौरान कहा, “सैनिकों को बाहर निकालना शुरू करें.” उन्होंने कहा कि उन्होंने खेरसॉन से सैनिकों को वापस निकालने और नीपर नदी के बाएं किनारे पर सुरक्षा व्यस्था स्थापित करने का “कठिन निर्णय” प्रस्तावित किया है. माना जा रहा है कि इसकी वजह ये है कि इस इलाके पर यूक्रेनी सेना हफ्तों से आगे बढ़ रही है, जिससे रूसी सेना को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा. यूक्रेनी व रूसी सेनाओं के बीच युद्ध के साढ़े आठ महीने से ज्यादा बीतने के बाद पिछले बुधवार को यूक्रेन के गांवों व कस्बों में भीषण लड़ाई व गोलाबारी देखने को मिली. दोनों ही सेनाओं पर विभिन्न मोर्चों पर आगे बढ़ने का दबाव है.

ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि सर्दियां शुरु होने से पहले ही रूस युद्ध खत्म करने का ऐलान कर दे. यूक्रेन पर भी युद्ध खत्म करने का दवाब बढ़ता जा रहा है. अमेरिका और तमाम यूरोपीय देशों की मदद के बावजूद यूक्रेन इस युद्ध में कुछ खास बढ़त हासिल नहीं कर पाया है. वहीं रूस पर भी आर्थिक प्रतिबंध लगाने के तमाम फैसले बेकार साबित हुए हैं. ऐसे में ठंड के दौरान इस युद्ध से यूरोप की परेशानी भी बढ़ जाएगी, क्योंकि बिना रुसी गैस के घरों को गर्म रखना मुश्किल हो जाएगा. वहीं रुसी और यूक्रेनी सैनिकों के लिए युद्ध से ज्यादा ठंड जानलेवा साबित होगी.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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