Saturday, April 20, 2024
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कर्नाटक में हिजाब विवाद फिर से भड़कने की सम्भावना

 

कर्नाटक के दक्षिण जिलों में मुस्लिम संगठनों ने 13 नए निजी कॉलेज खोलने के लिए आवेदन किये हैं. माना जा रहा है कि अगर इन कॉलेजों के खोलने की अनुमति मिलती है तो इन कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबन्ध नहीं होगा और इन कॉलेजों की छात्राये हिजाब पहनकर अपनी पढाई करेंगी. ऐसे में माना जा रहा है कि जहां एक तरफ अदालत के फैसले से सभी स्कूल कॉलेजों में हिजाब पर प्रतिबन्ध लगे हैं, मुस्लिम संगठनों के कॉलेजों के खुलने से हिजाब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है.

याद रहे कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में नए निजी कॉलेजों के खुलने से हिन्दू और मुस्लिम संगठनों के बीच हिजाब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है. इस खेल को राजनीतिक चश्मे से देखने की जरूरत है.

पिछले 5 साल में अल्पसंख्यक संगठनों ने एक भी आवेदन नहीं किया था. अब जानकार मान रहे हैं कि नए कॉलेज खुलने से हिजाब विवाद और गहराएगा, क्योंकि राज्य के सभी शासकीय शिक्षण संस्थानों में हिजाब पर पाबंदी है. इस वजह से अल्पसंख्यक समुदाय की सैकड़ों लड़कियों ने परीक्षा तक छोड़ दी थी.

कर्नाटक में पिछली सरकार (कांग्रेस) ने सरकारी शिक्षण संस्थानों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य कर दिया था. निजी स्कूलों को अपना ड्रेस कोड तय करने की छूट है. अब क्योंकि सरकारी स्कूल-कॉलेजों में धार्मिक चिह्नों पर प्रतिबंध लग गया है, ऐसे में निजी शिक्षण संस्थानों पर निर्भर करता है कि वो अपने यहां हिजाब की अनुमती दें या नहीं. इसलिए मुस्लिम संगठनों ने अपने कॉलेज खोलने का फैसला किया है.

बता दें कि कर्नाटक में पिछले कई महीनों से चले आ रहे हिजाब विवाद पर हाई कोर्ट ने मार्च महीने में फैसला सुना दिया था. फैसले में हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म का अभिन्न हिस्सा नहीं है. अपने अहम फैसले में हाई कोर्ट ने हिजाब पहनने पर छात्राओं को राहत नहीं दी. कोर्ट ने अपने फैसले में स्कूल में हिजाब पहनने पर रोक जारी रहने की बात कही है. फैसला सुनाते समय चीफ जस्टिस ने पूछा, क्या हिजाब पहनना जरूरी है ? या नहीं, हाई कोर्ट ने हिजाब पहनने की इजाजत देने वाली सभी याचिकाएं भी खारिज कर दी थी. कोर्ट ने कहा कि सरकार के आदेश को खारिज करने का मतलब नहीं क्योंकि हिजाब पर सरकार का आदेश संवैधानिक है. जनवरी में कर्नाटक के अलग – अलग कॉलेज की छात्राओं ने कैंपस के बाहर हिजाब पहनकर धरना भी दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मसले पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया था.

शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नए कॉलेज खोलने के आवेदनों की जांच की जा रही है. एक आवेदन मंजूर हो गया है. आवेदक कॉलेज खोलने के सभी मापदंडों को पूरा करते हैं तो उन्हें मंजूरी दी जा सकती है.

लेकिन, अब हिजाब के समर्थन में आंदोलन करने वाले संगठनों ने संघर्ष तेज कर दिया है. लड़कियों का स्कूल नहीं आना और बिना हिजाब परीक्षा देने से इनकार करना भी आंदोलन का हिस्सा है. इसकी अगुआई कर रहे कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) ने हाल ही में एक रैली की थी.

कर्नाटक के मांड्या में पीईएस कॉलेज में 8 फरवरी 2022 को हिजाब पहनकर आई एक मुस्लिम छात्रा को जय श्रीराम के नारे लगा रहे प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया था. इस घटना के बाद विवाद ने और तूल पकड़ लिया था. कर्नाटक में हिजाब को लेकर विवाद 1 जनवरी को शुरू हुआ था. यहां उडुपी में 6 मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने के कारण कॉलेज में क्लास रूम में बैठने से रोक दिया गया था. कॉलेज मैनेजमेंट ने नई यूनिफॉर्म पॉलिसी को इसकी वजह बताया था.

इसके बाद इन लड़कियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की थी. लड़कियों का तर्क है कि हिजाब पहनने की इजाजत न देना संविधान के आर्टिकल 14 और 25 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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