Sunday, February 25, 2024
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कर्नाटक में फिर हिजाब पर एक्शन, 6 मुस्लिम छात्राएं निलंबित

 

अखिलेश अखिल

दक्षिण भारत के कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में हिजाब को लेकर एक बार फिर से खबरे आ रही है. स्कूल में हिजाब पहनने पर रोक के बाद भी जब कई छात्राएं हिजाब पहन कर स्कूल पहुंची तो अधिकारियों ने कई चेतावनियों के बाद 6 मुस्लिम छात्राओं को निलंबित कर दिया. वहीं, एक अन्य कार्रवाई में 12 छात्राओं को कक्षाओं में भाग लेने के दौरान हिजाब पहनने के लिए स्कूल से वापस भेज दिया गया था.
न्यूज एजेंसी एएनआई ने शासकीय प्रथम श्रेणी कॉलेज उप्पिनंगद्यो के प्राचार्य के हवाले से कहा, ”हिजाब पहनकर यहां पहुंचने पर एक और छात्रा को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया. उन्हें कल से छह दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया था.”
बार-बार हिजाब दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उप्पिनंगडी गवर्नमेंट प्री यूनिवर्सिटी कॉलेज के छह छात्राओं को निलंबित कर दिया गया है. कॉलेज के प्राचार्य ने कॉलेज व्याख्याताओं के साथ बैठक करने के बाद छात्रों को निलंबित करने का निर्णय लिया. 6 छात्राओं को सरकारी आदेश और कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने वाले हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी दी गई.
हालांकि हम्पनाकट्टे के पास मंगलुरु यूनिवर्सिटी कॉलेज के अधिकारी हिजाब पहनकर आए छात्राओं को वापस भेज रहे हैं. गुरुवार को हिजाब पहनकर आई 16 छात्राओं ने मांग की कि उन्हें कक्षाओं में जाने की अनुमति दी जानी चाहिए. कॉलेज के प्राचार्य ने कक्षाओं में उनके प्रवेश से इनकार कर दिया और उन्हें वापस भेज दिया. सिंडिकेट की बैठक में यह फैसला लिया गया. छात्राएं जिला आयुक्त के कार्यालय भी गई थीं और हिजाब पहनकर कक्षाओं में नहीं जाने दिए जाने की शिकायत की थी.
डीसी ने उन्हें सरकार के नियमों और कोर्ट के आदेश का पालन करने की सलाह दी थी. हालांकि, छात्राएं नहीं मानी और गुरुवार को हिजाब पहनकर कॉलेज पहुंची.
उडुपी प्री-यूनिवर्सिटी गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज की 6 छात्राओं द्वारा शुरू किया गया हिजाब विवाद राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा था. इस मामले की सुनवाई के लिए गठित उच्च न्यायालय की विशेष पीठ ने कक्षाओं में हिजाब सहित किसी भी धार्मिक प्रतीक को पहनने के खिलाफ फैसला सुनाया. अदालत ने स्कूलों में हिजाब पहनने की अनुमति मांगने वाली छात्राओं द्वारा दायर याचिका को भी खारिज कर दिया था.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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