Sunday, February 25, 2024
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एपीसीआर ने खंडवा साम्प्रदायिक झड़प मामले में 28 लोगों की जमानत मध्य प्रदेश हाई कोर्ट से मंज़ूर कराई

नई दिल्ली, एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) ने कलीम और अन्य बनाम मध्य प्रदेश राज्य के मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय से 28 लोगों की जमानत मंज़ूर कराने में कामयाबी हासिल कर ली है. यह मामला खंडवा जिले के इमलीपुरा इलाके में 30 जुलाई, 2014 को हुई सांप्रदायिक झड़प से जुड़ा हुआ था, जिसके नतीजे में हाल के दिनों में ही सत्र न्यायालय ने 40 आरोपियों को दोषी ठहराया था. इनमें से कई सजायाफ्ता आरोपी घटना के समय नाबालिग थे और अब उन्हें अपने स्वास्थ्य, और भविष्य की संभावनाओं को चिंताएं सता रही हैं.

दोषी आरोपियों पर एक पुलिस दल पर पथराव करने का आरोप लगाया गया था, जिसके नतीजे में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 188 (एक लोक सेवक द्वारा कानूनी रूप से घोषित आदेश की अवज्ञा) और अन्य धाराओं में मुक़दमा पंजीकृत हुआ था. हाल ही में, मध्य प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी और उनमें से हर एक पर 6,500 रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था.

हालांकि, दोषियों के परिवारों का कहना है कि वह शुक्रवार का दिन था और घासपुर इलाके के सभी पुरुष घटना के समय नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में मौजूद थे. कुछ बदमाशों ने आवेश में आकर पुलिस पर पत्थर फेंके, लेकिन इस तरह की घटना के लिए कोई आम इरादा या योजना नहीं थी. घटना के बाद कई निर्दोषों को भी इस मामले में झूठा फँसाने के पुलिस पर इल्ज़ाम हैं.

सजायाफ्ता आरोपियों के अधिकांश परिवार गरीब और हाशिए की पृष्ठभूमि से आते हैं, और इस मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह अपने एकमात्र आमदनी के स्त्रोत को भी खो चुके हैं. एपीसीआर मप्र उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ के समक्ष आपराधिक अपील संख्या 1303/2023 में अधिवक्ता कबीर पॉल एवं अधिवक्ता संकल्प कोचर के माध्यम से इस मामले में 28 आरोपियों को कानूनी प्रतिनिधित्व प्रदान कर रहा था.

अपीलकर्ताओं ने अपनी सजा निरस्त करने की अपील की है, और उनके वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य में कई चूक और विरोधाभासों का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट ने उन्हें गलत तरीके से अपराधों का दोषी ठहराया है. अपीलकर्ता 20 दिसंबर, 2023 को फैसला आने के बाद से पिछले चार महीनों से जेल में हैं और उनकी इस अपील की सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना है.

दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ताओं की जमानत याचिका को स्वीकार कर लिया और उनकी अपील के लंबित रहने के दौरान उनकी जेल की सजा को निलंबित करने का निर्देश दिया. अपीलकर्ताओं को 50,000 रुपये की राशि के निजी मुचलके के साथ और एक जमानती प्रस्तुत करने पर रिहा करने का आदेश न्यायालय ने सुनाया.

बता दें कि एपीसीआर इंसाफ और मानवाधिकारों को सबके सामने लाने के लिए प्रतिबद्ध है. एपीसीआर ने सभी संबंधित व्यक्तियों और संगठनों को उनकी इन सर्गर्मियों में समर्थन करने का आग्रह किया है.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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