Saturday, April 13, 2024
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उत्तराखंड के बाद अब यूपी में यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी !

अंज़रूल बारी

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बयानों पर गौर करें कि यूपी की योगी सरकार अब सूबे में सामान नागरिक संहिता लागू करने की तैयारी कर रही है. पांच राज्यों के चुनाव के दौरान बीजेपी ने अपने घोषणा पत्रों में इसकी घोषणा की थी कि बीजेपी की सरकार बनने के बाद सामान नागरिक संहिता लागू किया जाएगा ताकि सभी लोगों के लिए एक कानून बन सके. एक देश एक कानून की बात बीजेपी ने कही थी. पांच राज्यों के चुनाव परिणाम में बीजेपी को चार राज्यों में सरकार बनाने का मौका मिला. इसके बाद सबसे पहले उत्तराखंड की धामी सरकार ने सामान नागरिक संहिता पर करवाई शुरू कर दी. अब यूपी में भी इसे लागू करने की तैयारी चल रही है.

अब डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने पर बड़ा बयान दे दिया है. डिप्टी सीएम केशव प्रयाद मौर्य ने कहा है कि हर कोई समान नागरिक संहिता की मांग कर रहा है. इसका स्वागत कर रहा है. लखनऊ में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार भी इस दिशा में विचार कर रही है. हम लोग इसके समर्थन में हैं. यह उत्तर प्रदेश और देश के लोगों के लिए जरूरी भी है. डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता का मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख वादों में से एक है. डिप्टी सीएम के इस बयान पर राजनीति गरमानी तय है. उत्तराखंड में भाजपा सरकार ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है. ऐसे में डिप्टी सीएम के बयान से साफ लग रहा है कि यूपी में भी इस दिशा में काम शुरू हो रहा है या होने वाला है.
दरअसल यूनिफॉर्म सिविल कोड का मतलब जाति और धर्म, समुदाय के लिए एक कानून लागु करने से है. समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक और जमीन जायदाद के हिस्से में सभी धर्मों के लिए केवल एक ही कानून लागू किया गया है. इसका सीधा अर्थ है कि सभी नागरिकों के लिए एक कानून होगा. इसका किसी भी समुदाय से कोई संबंध नहीं होगा. इस कोड के तहत राज्य में निवास करने वाले लोगों के लिए एक समान कानून का प्रावधान किया गया है. इससे धर्म के आधार पर मिलने वाली छूट से लोगों को वंचित होना पड़ेगा. इसी मामले को लेकर इसके विरोध में स्वर उठते रहे हैं.
समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी समुदाय के लोगों को एक समान अधिकार मिल जाएंगे. ऐसे में मुस्लिम पर्सनल लॉ, पारसी पर्सनल लॉ, क्रिश्चियन पर्सनल लॉ खत्म हो जाएंगे. हालांकि अल्पसंख्यक समाज का एक बड़ा हिस्सा इस कानून के खिलाफ है. लेकिन बीजेपी का कहना है कि इस कानून के जरिये तमाम लोगों को संविधान के तहत मिले अधिकार मिल जाएंगे. कुछ समुदाय के पर्सनल लॉ में महिलाओं के अधिकार सीमित हैं. उन्हें बराबरी का अधिकार मिल जाएगा. साथ ही, संपत्ति के अधिकार के मामले में भी पिता की संपत्ति पर अधिकार और गोद लेने के संबंध में महिलाओं को समान अधिकार का लाभ मिलेगा. कुछ विशेष समुदाय इसी कारण समान नागरिक संहिता का विरोध करती है.
यह बात और है कि सामान नागरिक संहिता को लेकर अक्सर चर्चाएं तो लम्बे समय से होती है, लेकिन उसपर अमल कभी नहीं हुआ. खासकर बीजेपी इसे लागू करने को लेकर कुछ ज्यादा की सक्रिय रही है. अभी केवल गोवा राज्य में यह कानून लागू है. पुर्तगाल शासनकाल के दौरान ही इसे लागू किया गया था. वर्ष 1961 में गोवा सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड के साथ ही बनी थी. यूनिफॉर्म सिविल कोड पर कार्रवाई शुरू करने वाला दूसरा राज्य उत्तराखंड बना है. वहां पर पुष्कर सिंह धामी सरकार ने शपथ ग्रहण के बाद कैबिनेट की बैठक में इसके लिए कमेटी गठन का निर्णय लिया. यह कमेटी यूनिफॉर्म सिविल कोड को प्रदेश में लागू करने के लिए ड्राफ्ट तैयार करेगी.
यूपी में अगर यह कानून लागू करने की शुरुआत होती है तो निश्चित तौर पर सूबे से लेकर देश की राजनीति में एक नया बवाल खड़ा हो सकता है. देश के अल्पसंख्यक हमेशा इस कानून का विरोध करते रहे हैं. अब देखना है कि यूपी सरकार इस मामले में कितना कदम आगे बढ़ाती है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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