Saturday, April 20, 2024
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अब होगी नालंदा से नागपुर की लड़ाई

अखिलेश अखिल

ये बात और है कि 2024 से पहले 2023 में करीब दस राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं. और बीजेपी ने इसकी दिदुंभी भी बजा दी है. लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की निगाह तो 2024 के लोकसभा चुनाव पर ही टिकी है. बिहार को हांकते हांकते अब उनका मन भर चुका है. वो जिस उम्र में पहुंच गए हैं उसमे कोई बड़ा खेल करने को तैयार हैं. नीतीश कुमार देश के चर्चित कुछ नेताओं में शुमार हैं. और उनकी अपनी हस्ती भी है. वो राजनीतिक डिंगबाजी ज्यादा नही करते, लेकिन कोई उनसे टकराने की कोशिश करता है तो उसे छोड़ते भी नही हैं.

बीजेपी के साथ लंबे समय तक उन्होंने बिहार को चलाया है. गरीब राज्य बिहार को उन्होंने अमीर तो नही बनाया. लेकिन इतना जरूर किया है कि बिहार को कोई हंस नही सकता. बीस साल पहले का बिहार अब बदल गया है. सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियां भी बदली है. और लोगों का मिजाज भी. लेकिन इन्ही 20 सालों में नीतीश कुमार को कई अनुभव भी हुए हैं. बीजेपी के साथ सरकार चलाने की वजह से ही आज जदयू की को स्थिति है. इसका ज्ञान उन्हें हो गया है. यह बात और है कि इसका जिक्र भी वो कई बार कर चुके है. और अपनी गलती का अहसास भी.

अब उनके निशाने पर सिर्फ बीजेपी है और 2024 का चुनाव. बीजेपी से संबंध तोड़ते हुए उन्होंने एक ही बात कही थी. उन्होंने कहा था कि जो 2014 में आए थे, 2024 में नही आयेंगे. नीतीश कुमार अब अपने उस बयान को अमलीजामा पहनाने की जुगत में हैं. वो किसी भी सूरत में बीजेपी के बढ़ते कदम को रोकने को तैयार हैं. और 2024 के चुनाव में मोदी को हराने के लिए कृत्य संकल्पित.

यही वजह है कि पिछले दिनों नीतीश कुमार ने एक बड़ा बयान दिया. इस बयान के बाद बिहार से लेकर दिल्ली की राजनीति गरमा गई. उन्होंने कहा कि उनके बाद उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ही महागठबंधन का नेतृत्व करेंगे. 2025 का बिहार चुनाव तेजस्वी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा. हालाकि नीतीश कुमार के बयान के बाद तेजस्वी यादव का भी बयान आया. तेजस्वी ने कहा कि अभी 2025 काफी दूर है. हमारी असली चुनौती 2024 की है. नीतीश कुमार हमारे अभिभावक हैं. उनके ही निर्देश का हम पालन करेंगे. और बीजेपी से मुकाबला करेंगे.

इधर, नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी को हटाना ही उनका लक्ष्य है. मैं प्रधानमंत्री पद के लिए नहीं, बीजेपी को हटाने के लिए आगे बढ़ना चाहता हूं. इतनी सी ही बात है. इसे ही गढ़ना होगा. इसलिए महागठबंधन के विधायकों को एकजुट होना होगा. दरअसल, कुढ़नी उपचुनाव में हार के बाद यह अटकलें लगाई जाने लगी थी कि राजद ने जदयू का साथ नहीं दिया और महागठबंधन में इस वक्त कुछ भी ठीक नहीं है.

इसके बाद एक बैठक में राजद, जदयू, कांग्रेस, वाम दल और हम के सभी विधायक और विधान पार्षद मौजूद थे.

राजद ने बैठक में नीतीश कुमार के इस एलान का स्वागत किया है. नीतीश कुमार के इस फैसले के पीछे उनकी विपक्षी एकता की मुहिम को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है. हलांकि, अभी नीतीश कुमार ने अपनी भूमिका को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है.

इससे पहले सोमवार को नालंदा में एक कार्यक्रम के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, आने वाले दिनों में राजनीतिक लड़ाई ”नागपुर और नालंदा के बीच” होगी. तेजस्वी ने कहा कि नागपुर आरएसएस का मुख्यालय है. और नालंदा प्राचीन शिक्षा का एक बड़ा केंद्र है. उन्होंने कहा, “हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नालंदा वह भूमि रही है. जहां विश्व का पहला विश्वविद्यालय अस्तित्व में आया. आने वाले दिनों में राजनीतिक लड़ाई नालंदा और नागपुर के बीच होगी. आप सभी जानते हैं कि कैसे नागपुर वाले समाज में तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं, एक समुदाय को दूसरे समुदाय के खिलाफ खड़ा करते हैं.” उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई संघ की विचारधारा से है.

सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे भाकपा (माले) लिबरेशन के विधायक दल के नेता महबूब आलम ने कहा कि मुख्यमंत्री ने तेजस्वी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह भविष्य के नेता हैं, जिनके नेतृत्व में 2025 का विधानसभा चुनाव लड़ा जाएगा. हमारा विचार है कि इससे महागठबंधन को लाभ होगा. हम बीजेपी के प्रतिनिधित्व वाली सांप्रदायिक ताकतों से लड़ रहे हैं.

सरकार में कैबिनेट मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री कुछ समय से कहते आ रहे हैं कि भविष्य तेजस्वी और उनके जैसे युवाओं का है. उन्होंने ऐसा कल नालंदा में भी कहा था, जहां मैं मौजूद था. उन्होंने आज फिर इसे दोहराया.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को एक बार फिर आरोप लगाया था कि 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने गठबंधन के बावजूद जद (यू) को हराने की साजिश रची थी. उन्होंने दोहराया कि बीजेपी विरोधी दल 2024 के लोकसभा चुनावों में भारी बहुमत से जीत सकते हैं, अगर वो एक-दूसरे से हाथ मिलाने के लिए सहमत हों.

उन्होंने आरोप लगाया था कि पिछले विधानसभा चुनावों में उनके दल के असंतोषजनक प्रदर्शन का कारण बीजेपी ही थी. पूर्व गठबंधन सहयोगी बीजेपी का नाम लिए बिना नीतीश ने कहा था कि उन्हें (बीजेपी) याद दिलाना चाहिए कि चाहे 2005 या 2010 के विधानसभा चुनाव हों, इससे पहले कभी भी हमारी पार्टी ने कम सीटें नहीं जीती थीं. 2020 में हमें नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि उन्होंने हमारे उम्मीदवारों को हराने की कोशिश की.

नीतीश ने यह भी कहा था कि वह एक और कार्यकाल के लिए सीएम बनने के इच्छुक नहीं थे, लेकिन बीजेपी के आग्रह पर पद संभालने को राजी हुए. उन्होंने कहा कि बिहार को केंद्र सरकार से कुछ नहीं मिला. वह (पीएम नरेंद्र मोदी) उस राज्य से ताल्लुक रखते हैं जो ब्रिटिश राज के समय से ही समृद्ध रहा है. गरीब राज्यों का विकास किए बिना देश प्रगति नहीं कर सकता.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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