Sunday, February 25, 2024
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अब उर्दू-फारसी और अरबी तक ही सीमित रहेंगे मदरसों के छात्र

 

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी में मदरसों में मौलवी, आलिम, मुंशी की पढ़ाई की जगह राज्य के दूसरे कॉलेजों में तकनीकी व विज्ञान की दी जा रही शिक्षा मदरसों में भी दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल एक याचिका को खारिज कर दिया है. शुक्रवार के दिन खारिज इस याचिका को कोर्ट ने गैर पोषणीय बताया है. यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने हाईकोर्ट की वकील सहर नकवी की तरफ से दाखिल याचिका को खारिज करते हुए पारित किया है.

मदरसों में तकनीकी व विज्ञान की शिक्षा की मांग को लेकर याची अधिवक्ता ने इससे पहले भी हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. जिसे दोबारा याचिका दाखिल करने की कोर्ट से अनुमति लेते हुए वापस ले लिया था. इसके बाद इस याचिका को एक बार फिर इसी मुद्दे को लेकर दाखिल की गई थी. कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में याची अधिवक्ता का कहना था कि मदरसों में पढ़ रहे मुस्लिम बच्चे केवल अरबी, फारसी, उर्दू की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. इसलिए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो अन्य कॉलेजों में दी जा रही है.

याची का कहना यह भी था कि जब तक मदरसों में तकनीकी व वैज्ञानिक शिक्षा नहीं दी जाएगी. तब तक बच्चों को मदरसों की पढ़ाई से कुछ भी हासिल नहीं होगा. राज्य के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि मदरसों में दी जा रही मौलवी, मुंशी व आलिम की शिक्षा यूपी बोर्ड के जूनियर हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के बराबर है. इतना ही नहीं उन्होंने सरकार की तरफ से मदरसों में दी जा रही शिक्षा व इससे जुड़े कानूनी पहलुओं को भी कोर्ट में रखकर ध्यान खींचना चाहा, लेकिन अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जनहित याचिका को गैर पोषणीय मानते हुए खारिज कर दिया.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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