Home ताज़ातरीन संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप कश्मीर के ‘मूल मुद्दे’ को सुलझाएं: पाक राजनयिक सलमान शरीफ

संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप कश्मीर के ‘मूल मुद्दे’ को सुलझाएं: पाक राजनयिक सलमान शरीफ

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संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के अनुरूप कश्मीर के ‘मूल मुद्दे’ को सुलझाएं: पाक राजनयिक सलमान शरीफ

नई दिल्ली: पाकिस्तान भारत सहित सभी पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है, और जम्मू – कश्मीर के “मूल मुद्दे” को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप सुलझाया जाना चाहिए, यह बयान नई दिल्ली में तैनात पाकिस्तानी राजनयिक सलमान शरीफ ने गुरुवार को पाकिस्तान दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए दिया. याद रहे कि वर्ष 1956 में अपना पहला संविधान पाकिस्तान ने अपनाया था. उन्होंने चांसरी लॉन में आयोजित समारोह में पाकिस्तान का झंडा भी फहराया. इस मौके पर उच्चायोग के अधिकारी, कर्मचारी और उनके परिवार उपस्थित थे. इस अवसर पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के संदेश भी पढ़े गए.

पाकिस्तानी मिशन के एक बयान के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान “भारत सहित सभी पड़ोसी देशों के साथ आपसी सम्मान के आधार पर शांतिपूर्ण संबंध चाहता है”. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से जम्मू-कश्मीर विवाद सहित सभी लंबित मुद्दों को हल करने में विश्वास रखता है.

बयान में कहा गया है, “शरीफ ने दोहराया कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति, स्थिरता और विकास के लिए, जम्मू-कश्मीर के मुख्य मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुसार ही हल किया जाना चाहिए.”

इस अवसर पर पाकिस्तान के लोगों को बधाई देते हुए पाक राजनयिक ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले संस्थापकों और शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी. उन्होंने काएद-ए-आज़म मुहम्मद अली जिन्ना के नज़रिया ए पाकिस्तान की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने वीरतापूर्ण संघर्ष का नेतृत्व किया, जिसके नतीजे में भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों के लिए एक अलग देश का निर्माण संभव हो सका, जो पाकिस्तान की शक्ल में विश्व के मानचित्र पर मौजूद है.

सलमान शरीफ ने इस बात पर भी ज़ोर देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने पिछले 75 वर्षों में कई तरह की चुनौतियों का सामना किया है. लेकिन तरक्की व खुशहाली के लिए देश आज भी उसी भावना के साथ जुटा हुआ है, जैसा 1947 में देश की स्थापना के समय हुआ था. उन्होंने मौजूदा समय में पाकिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए आंतरिक और बाहरी खतरों के खिलाफ देश की रक्षा के लिए हजारों पाकिस्तानियों, सशस्त्र बलों, सैनिकों की बहादुरी और उनके योगदान को भी तस्लीम किया.

कश्मीर और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर तीखे मतभेदों की वजह से भारत-पाकिस्तान संबंध पिछले एक दशक से भी अधिक समय से अपने सबसे खराब दौर से गुज़र रहे हैं. भारत सरकार द्वारा 2019 में जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे को खत्म करने के बाद नाराज़ पाकिस्तान ने संबंधों को कम करते हुए नई दिल्ली में अपने उच्चायुक्त को तैनात नहीं करने का फैसला किया था.

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