Saturday, March 25, 2023
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संबंधों की बहाली का मतलब मतभेदों का अंत नहीं, सऊदी विदेशमंत्री, अब बहरीन से भी रिश्ते सुधार ने जुटा तेहरान

सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा है कि राजनयिक संबंधों की बहाली का मतलब तेहरान के साथ सभी मतभेदों का अंत नहीं है. राजधानी रियाद से जारी एक बयान में सऊदी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान और सऊदी अरब संचार और बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाना चाहते हैं.

उन्होंने आगे कहा कि वह जल्द ही ईरानी समकक्ष से मिलने की उम्मीद कर रहे हैं. प्रिंस फैसल बिन फरहान ने कहा कि भविष्य में राजदूतों का आदान-प्रदान हमारे लिए सामान्य है. उन्होंने कहा कि वे रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष विराम चाहते हैं.

इधर सऊदी अरब से बेहतर होते रिश्तों की उम्मीद के बीच ईरान बहरीन से भी रिश्तों को सुधारने में जुट गया है. ईरान का कहना है कि वह बहरीन के साथ भी संबंधों की बहाली का स्वागत करेगा।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने कहा कि सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनीतिक संबंधों की बहाली गलतफहमियों के कूटनीतिक समाधान की सफलता का संकेत है. उन्होंने कहा कि ईरान और बहरीन के संबंध भी इस सिद्धांत से अछूते नहीं हैं.

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि क्षेत्र में सकारात्मक माहौल को देखते हुए कहा जा सकता है कि बहरीन समेत अन्य देशों के साथ संबंधों में सकारात्मक प्रगति हो सकती है.

इससे पहले मध्य पूर्व के दो प्रतिद्वंद्वी देश ईरान और सऊदी अरब ने चीन की मध्यस्ता से आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने और फिर से राजनायिक संबंध को फिर से बहाल करने का एलान किया था. याद रहे कि सात साल पहले दोनों देश ने भारी विवाद के बाद अपने राजनयिक रिश्ते तोड़ लिए थे. सऊदी अरब की देखा देखी बहरीन ने भी तेहरान से अपने रिश्ते ख़त्म कर लिए थे.

दरअसल 2016 में सऊदी अरब में एक जाने-माने शिया धर्म गुरु को फांसी दिए जाने के बाद तेहरान स्थित सऊदी दूतावास में ईरानी प्रदर्शनकारी घुस आए थे. इस घटना के बाद सऊदी अरब और बहरीन ने ईरान से अपने रिश्ते तोड़ लिए थे. इसके बाद से सुन्नी बहुल सऊदी अरब और शिया बहुल ईरान के बीच भारी तनाव रहा है.

Anzarul Bari
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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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