Saturday, April 20, 2024
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विक्रांत के बाद आज आईएनएस स्वदेशी तारगिरि की होगी लॉन्चिंग 

 

दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना को और मजबूत करने को लेकर लगातार काम चल रहा है. आधुनिक हथियारों, मिसाइल, हेलीकॉप्टर से लेकर बड़े युद्धपोतों को सेना में शामिल किया जा रहा है. भारत के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को अभी कुछ दिन पहले ही भारतीय नौसेना को सौंपा गया है. विक्रांत की भव्य कमीशनिंग पर उत्साह अभी खत्म भी नहीं हुआ है और देश 11 सितंबर को भारतीय नौसेना के स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ के लॉन्च का गवाह बनने के लिए तैयार है.

पिछले कुछ सालों में हथियारों और युद्धपोतों के ‘खरीदार’ से ‘निर्माता’ के रूप में परिवर्तन होने की भारत की छवि बन रही है. भारत में 1964 से अब तक 90 से अधिक छोटे से लेकर बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर तक बनाए जा चुके हैं.

भारतीय नौसेना के तीसरे स्टील्थ फ्रिगेट तारागिरी को प्रोजेक्ट 17ए के तहत तैयार किया जा रहा है. मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा इसे लॉन्च किया जाएगा. इस युद्धपोत में करीब 75 फीसदी स्वदेशी उपकरणों का इस्तेमाल किया जाएगा. तारागिरी को 10 सितंबर, 2020 से निर्माण किया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसकी डिलीवरी अगस्त 2025 तक होने की उम्मीद है.

युद्धपोत ‘तारागिरी’ 3510 टन वजनी है. तारागिरी को भारतीय नौसेना के इन-हाउस ब्यूरो ऑफ़ नेवल डिज़ाइन की ओर से डिज़ाइन किया गया है. 149 मीटर लंबा और 17.8 मीटर चौड़ा ये जहाज दो गैस टर्बाइन और दो मुख्य डीजल इंजनों के संयोजन से संचालित होगा. इसकी गति 28 समुद्री मील (लगभग 52 किमी प्रति घंटे) से अधिक होगी. आईएनएस तारागिरी का डिस्प्लेसमेंट 6670 टन है. यह मैक्सिमम 59 किमी प्रतिघंटा की गति से समंदर की लहरों को चीरते हुए दौड़ सकता है. इस स्वदेशी युद्धपोत पर 35 अधिकारियों के साथ 150 लोग तैनात किए जा सकते हैं.

युद्धपोत ‘तारागिरी’ पर एंटी एयर वॉरफेयर के लिए भविष्य में सर्फेस टू एयर में मार करने वाली 32 बराक 8 ईआर या फिर भारत का सीक्रेट हथियार तैनात की जा सकती हैं. इस पर ब्रह्मोस मिसाइल की भी तैनाती की जा सकती है. इस युद्धपोत में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए 2 ट्रिपल टॉरपीडो ट्यूब्स हैं.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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