Home ताज़ातरीन भारत जोड़ो यात्रा : राहुल ने कहा नफरत के बाजार में मुहब्बत की दूकान है यात्रा 

भारत जोड़ो यात्रा : राहुल ने कहा नफरत के बाजार में मुहब्बत की दूकान है यात्रा 

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भारत जोड़ो यात्रा : राहुल ने कहा नफरत के बाजार में मुहब्बत की दूकान है यात्रा 

कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा जैसे जैसे दिल्ली के नजदीक बढ़ रही है, राहुल गाँधी आक्रामक होते जा रहे हैं. राजस्थान में अपनी यात्रा के अंतिम दिन राहुल ने कहा कि बीजेपी के लोग पूछ रहे हैं कि जब भारत टूटा ही नहीं तो यह भारत जोड़ो यात्रा किसलिए ? इसका जबाव भी राहुल ने दिया. उन्होंने कहा कि यह यात्रा नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान है. मैं मुहब्बत की दूकान खोल रहा हूँ.

राहुल गांधी ने अपनी यात्रा को लेकर कहा कि यह देश मोहब्बत का है, नफरत का नहीं है. इसलिए वह नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोल रहे हैं. यहीं नहीं उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से भी मोहब्बत की दुकान खोलने की अपील की है. राजस्थान में एक जनसभा में राहुल गांधी ने सुझाव दिया कि राजस्थान का हर मंत्री हर महीने एक दिन कम से कम 15 किलोमीटर पैदल यात्रा पर निकाले ताकी वह आम लोगों तक पहुंच सके और उनकी शिकायतों का समाधान कर सके.

राहुल गांधी ने स्कूलों में अंग्रेजी के इस्तेमाल की आलोचना करने के लिए भी बीजेपी नेताओं पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी के मुख्यमंत्रियों, सांसदों और विधायकों के बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूलों में पढ़ते हैं जबकि वो भाषण देते हैं कि अंग्रेजी किसी को नहीं बोलनी चाहिए. राहुल गांधी ने कहा कि उनकी यात्रा कई बार बीजेपी कार्यालयों के आगे से गुजरी जिस दौरान बीजेपी नेता वो कार्यकर्ता इशारों-इशारों में उनकी यात्रा को लेकर सवाल खड़े करते थे.

सभा में बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आप मुझसे नफरत कर सकते हैं. आप मुझे गाली दे सकते हैं.. यह आपके दिल की बात है. आपका बाजार नफरत का है, मेरी दुकान मोहब्बत की है. राहुल ने यह भी साफ कर दिया कि वो अपनी नहीं पूरे संगठन की बात कर रहे हैं, जिसने इस देश को आजादी दिलाई. अपने भाषण में राहुल गांधी ने महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल बीआर आंबेडकर और मौलाना अबुल कलाम आजाद को लेकर कही कि इन सब ने नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोली थी. अब यही हम करते हैं.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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