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बीजेपी और विपक्ष के राजनीतिक प्रपंच की ड्रामेबाजी 

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बीजेपी और विपक्ष के राजनीतिक प्रपंच की ड्रामेबाजी 

अखिलेश

सत्ताधारी बीजेपी कहती है कि उसके शासन में सब कुछ फील गुड जैसा है. देश में अमन-चैन है, और दुनिया में भारत की हैसियत लगातार बढ़ रही है. लेकिन विपक्ष ऐसा नहीं मानता. देश की अंदुरुनी हालत पर जब विपक्ष आंकड़े पेश करता है तो तस्वीर कुछ अलग ही दिखती है. बेरोजगारी, महंगाई, भारत-चीन के बिगड़ते रिश्ते, समाज में बढ़ती दुश्मनी, साम्प्रदायिक माहौल, गरीबी और अमीरी की बढ़ती खाई, रुपये की लगातार कमजोरी पर उठते सवाल कई दफा देश को परेशान तो करते हैं, लेकिन लोभ और माया से घिरी जनता सरकार के सामने नतमस्तक है. हर साल चुनाव होते हैं और हार जीत की दुदुम्भी बजती है. लेकिन माहौल नहीं बदलता. ऐसे में सामने फिर लोकसभा चुनाव है. करीब डेढ़ साल पहले से ही पक्ष और विपक्ष में भिड़ंत हैं. अपराजय हो चुकी बीजेपी सामने वाले को भाव नहीं देती तो विपक्ष के पास चारा यही है कि सब एक होकर बीजेपी को चुनौती दे. लेकिन क्या यह इतना सरल काम है ? बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लग रहा है कि विपक्ष एक हो सकता है और ऐसा हुआ तो बीजेपी को हराया जा सकता है.

अगले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ साझा लड़ाई के लिए विपक्ष को एकजुट करने दिल्ली पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो दिन में पांच विपक्षी नेताओं से मुलाकात की. नीतीश विपक्षी नेताओं से मिले और यह भी स्पष्ट किया कि वो प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं हैं. उन्होंने कहा कि उनकी कोई इच्छा नहीं है. वो सिर्फ यह चाहते हैं कि विपक्षी पार्टियां साथ आएं और अगले चुनाव में बीजेपी को हराने के लिए एक साथ लड़ें.

नीतीश ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की. वो सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी से भी मिले और इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला से मुलाकात की. एक दिन पहले वो कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से भी मिले थे. वो अखिलेश यादव से भी मिले और मुलायम सिंह यादव से भी. वो चौटाला से भी मिले. अगले कुछ दिनों में वो शरद पवार से मिलने वाले हैं. तृणमूल कांग्रेस, शिव सेना और बीजू जनता दल के नेताओं से भी मिलने का उनका कार्यक्रम है.

बिहार में बीजेपी से तालमेल तोड़ कर राजद के साथ सरकार बनाने के बाद से ही नीतीश बीजेपी पर हमलावर हैं, और उन्होंने विपक्षी पार्टियों को एकजुट करने का अभियान शुरू किया है. पिछले दिनों तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने पटना में उनसे मुलाकात की. नीतीश कुमार ने बीजेपी का साथ छोड़ने के बाद कहा था कि जो 2014 में जीते हैं. वो 2024 में नहीं जीत पाएंगे. बहरहाल, नीतीश कुमार मंगलवार को अरविंद केजरीवाल से उनके सरकारी आवास पर मिले, जिसके बाद केजरीवाल ने ट्विट करके बताया कि दोनों के बीच राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मसलों पर चर्चा हुई.

केजरीवाल ने ट्विट करके बताया कि नीतीश कुमार के साथ बातचीत में बीजेपी के ऑपरेशन लोटस और विपक्षी पार्टियों के विधायकों की खरीद-फरोख्त के साथ साथ कई मसलों पर बातचीत हुई. सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने भी ट्विट करके बताया कि नीतीश कुमार के साथ मुलाकात में राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मसलों पर बातचीत हुई. नीतीश के इस प्रयास का क्या असर होगा. इसे तो अभी देखना होगा, लेकिन बीजेपी की परेशानी जरूर बढ़ी है. अब वह भी अगले चुनाव की रणनीति बना रही है.

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सिर्फ विपक्ष ही नही बल्कि बीजेपी ने भी अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी है. दरअसल, दिल्ली बीजेपी मुख्यालय में लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर बड़ी बैठक हुई. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में उन 144 लोकसभा सीट को जीतने की रणनीति तैयार की गई है, जिनपर बीजेपी 2019 के चुनाव में मामूली अंतर से हार गई थी. जानकारी के अनुसार, इनमें उन लोकसभा क्षेत्र को भी शामिल किया गया हैं, जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी दूसरे या तीसरे स्थान पर रही थी या जिन पर उसने कभी जीत दर्ज की ही नहीं है.

बताया जाता है कि ऐसी सीटों को कई समूहों में बांटकर हर एक समूह का प्रमुख एक केंद्रीय मंत्री को नियुक्त किया गया था. समूह का प्रभार लेने वाले मंत्रियों ने इन लोकसभा क्षेत्र में पार्टी की स्थिति का आंकलन किया और 2024 के चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने के लिए रणनीति तैयार कर उसकी रिपोर्ट आज की बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष को सौंपी है.

2019 में 303 सीटों पर जीत हासिल करने वाली उन सीटों पर और ताकत झोंकने के साथ, हारी हुई सीटों को विपक्षियों से छीनकर अपनी झोली में भरने की तैयारी कर चुकी है. यानी 2024 लोकसभा चुनाव को बीजेपी मिशन 400+ लेकर चल रही है. दिल्ली स्थित पार्टी कार्यालय में बीजेपी की इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महामंत्री बीएल संतोष, सुनील बंसल, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, अर्जुन मुंडा समेत 144 सीटों के लिए बनाए गए समूह के प्रभारी के तौर पर कई केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे.

अगर, नीतीश के प्रयास सफल रहे तो 2024 के चुनाव से पहले बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस के साथ-साथ सभी क्षेत्रीय पार्टियां साथ आ सकती हैं. यह पहली बार नहीं है, जब नीतीश महागठबंधन बनाने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं. 2015 में भी उन्होंने कोशिश की थी, लेकिन तब वो सफल नहीं हो सके थे. नीतीश के दिल्ली दौरे से 2024 के चुनाव पर क्या असर होगा? आइए इसे विस्तार से समझते हैं…

नीतीश का दिल्ली दौरा अगर सफल रहा और सभी दल एकजुट हो गए तो आगामी लोकसभा चुनाव में 500 से ज्यादा सीटों पर भाजपा से सीधी लड़ाई होगी. जिन दलों से नीतीश संपर्क साध रहे हैं, वो सभी दल दक्षिण से लेकर उत्तर भारत तक प्रभावी हैं.

देश के रूरल एरिया में लोकसभा की कुल 353 सीटे हैं, जिसमें 2019 में भाजपा को 207 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं कांग्रेस और अन्य के खाते में 126 सीटें गई थीं. सूत्रों के मुताबिक नीतीश और गठबंधन का पूरा फोकस इन रूरल एरिया पर है. यहां पर 2014 और 2009 के मुकाबले भाजपा सबसे ज्यादा कमजोर थी.

2009 में बीजेपी को रूरल एरिया में सिर्फ 77 सीटों पर जीत मिली थी. जो 2014 में बढ़कर 190 और 2019 में 207 पर पहुंच गई. वहीं सेमी अर्बन की बात करें तो यहां 2009 में बीजेपी को 20 सीटें मिली थीं, जबकि 2014 में यह बढ़कर 53 और 2019 में 58 पर पहुंच गई. हाइली अर्बन यानी उच्च शहरी एरिया की बात करे तो यहां 2009 में बीजेपी के पास 20 सीटें थीं, जो 2014 और 2019 में बढ़कर 40-40 सीटों पर पहुंच गई.

नीतीश कुमार ने सबसे पहले राहुल गांधी से मुलाकात की. राहुल कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं. और इसी महीने होने वाले चुनाव में उनका दोबारा पार्टी प्रेसिडेंट बनना लगभग तय है. कांग्रेस वर्तमान में लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी है. 2019 में कांग्रेस को 52 सीटों पर जीत मिली, जबकि 210 सीटों पर पार्टी दूसरे नंबर पर रही. यानी कुल 262 सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस भाजपा से सीधे मुकाबले में थी.

सीपीएम के महासचिव सीताराम येचुरी से भी नीतीश की मुलाकात हुई. राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त सीपीआई वर्तमान में केरल और पश्चिम बंगाल में मजबूत है. केरल में सीपीआई की सरकार भी है. दोनों राज्यों में लोकसभा की कुल 62 सीटें हैं. वर्तमान में सीपीएम के पास लोकसभा के 3 सांसद हैं.

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार की गिनती विपक्ष के सबसे अनुभवी नेताओं में होती है. पवार महाराष्ट्र से आते हैं और उनकी पार्टी की वहां मजबूत दावेदारी है. महाराष्ट्र में लोकसभा की कुल 48 सीटे हैं. एनसीपी के वर्तमान में 5 सांसद हैं. नीतीश ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से फोन पर बात की है. ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र में प्रभावी है, जहां लोकसभा की कुल 48 सीटें हैं. 2019 के चुनाव में शिवसेना भी बीजेपी के साथ मिलकर लड़ी थी, मगर विधानसभा चुनाव के बाद दोनों की राहें अलग हो गईं. अभी शिवसेना के 19 लोकसभा सांसद हैं. हालांकि पार्टी दो गुटों में बंट गई है और अब उद्धव की जगह एकनाथ शिंदे बीजेपी के समर्थन से राज्य के सीएम हैं.

विपक्षी पार्टियों में ममता की गिनती बीजेपी के खिलाफ सबसे मुखर नेता के तौर पर है. ममता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का यहां खासा प्रभाव है, जहां लोकसभा की 42 सीटें हैं. ममता की पार्टी ने पिछले चुनाव में 23 सीटों पर जीत हासिल की थी. पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के बेटे एचडी कुमारस्वामी के पास वर्तमान में जनता दल सेकुलर की कमान है. जनता दल सेकुलर कर्नाटक की क्षेत्रीय पार्टी है, जहां लोकसभा की कुल 28 सीटें हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीएस को एक सीट पर जीत हासिल हुई थी. हालांकि जेडीएस को चुनाव में 9.67% वोट मिले. अगर कर्नाटक में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर जेडीएस अपना वोट ट्रांसफर करा लेती है, तो बीजेपी को नुकसान संभव है.

आंध्र के सीएम जगनमोहन रेड्डी भी नीतीश से मिलने वाले नेताओं की फेहरिस्त में हैं. जगन की पार्टी आंध्र की क्षेत्रीय पार्टी है, जहां लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में जगन ने 19 सीटों पर जीत हासिल की थी. दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पार्टी आप की दिल्ली और पंजाब में मजबूत पकड़ है. दोनों राज्यों में आप सरकार में है. और इन दोनों जगहों पर लोकसभा की कुल 20 सीटें हैं. इसके अलावा आप ने गुजरात, गोवा और उत्तराखंड में भी आधार बना लिया है. ऐसे में इन राज्यों के भी चुनाव पर असर पड़ सकता है.

तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव ने पिछले दिनों ही पटना जाकर नीतीश कुमार से मुलाकात की थी. राव की पार्टी टीआरएस तेलंगाना की मजबूत क्षेत्रीय पार्टी है, जहां पर लोकसभा की 17 सीटें हैं. 2019 के चुनाव में टीआरएस को 9 सीटों पर जीत मिली थी. राव पिछले कई महीनों से बीजेपी के खिलाफ मोर्चा बनाने के लिए सक्रिय हैं. उधर, 22 सालों से ओडिशा के सीएम की कुर्सी संभाल रहे नवीन पटनायक भी नीतीश के संपर्क में हैं. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी के खिलाफ गठबंधन बनाने को लेकर उनसे नीतीश की फोन पर बात भी हुई है. पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल बजेड़ी ओडिशा की क्षेत्रीय पार्टी है, जहां लोकसभा की कुल 21 सीटें हैं. 2019 के चुनाव में बीजेडी को 12 सीटों पर जीत मिली थी.

शिक्षक भर्ती घोटाले में सजा काटकर जेल से बाहर आए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला का नाम भी नीतीश से मिलने वालों की सूची में है. चौटाला की पार्टी इनेलो हरियाणा की क्षेत्रीय पार्टी है, जहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. चौटाला की गिनती बड़े जाट नेताओं में होती है. हरियाणा के साथ-साथ पश्चिमी यूपी की भी 5 से ज्यादा सीटों पर जाट वोटर्स का असर है. बिहार और झारखंड अभी पूरी तरह से नीतीश के साथ हैं. वहीं 80 सीटों वाली यूपी को लेकर अब भी सस्पेंस बरकरार है. यूपी में बीजेपी के खिलाफ अखिलेश यादव ने विधानसभा चुनाव में गठबंधन बनाया था. हालांकि उस गठबंधन में कांग्रेस और बसपा जैसी बड़ी पार्टी बाहर थी. ऐसे में 2024 में यहां गठबंधन का क्या स्वरूप होगा, इस पर सस्पेंस बना हुआ है.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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