Home ताज़ातरीन पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख के काफिले पर हमला, बाल बाल बचे सिराजुल हक, एक की मौत

पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख के काफिले पर हमला, बाल बाल बचे सिराजुल हक, एक की मौत

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पाकिस्तान में जमात-ए-इस्लामी प्रमुख के काफिले पर हमला, बाल बाल बचे सिराजुल हक, एक की मौत

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में हुए एक आत्मघाती बम विस्फोट में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराज-उल-हक बाल बाल बच गए. यह धमाका उनके काफिले के बीच हुआ. धमाके की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई है, जबकि आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. धमाका जमाते इस्लामी प्रमुख को निशाना बना कर किया गया था.

बताया जा रहा है कि बलूचिस्तान प्रांत के झोब इलाके में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराज-उल-हक एक रैली में हिस्सा लेने अपनी गाड़ी में बैठकर जा रहे थे, जबकि बड़ी संख्या में लोग साथ साथ काफिले में चल रहे थे. रैली में पहुंचने से कुछ दूर पहले ही अचानक से काफिले के पास में ब्लास्ट हो गया. धमाके की आवाज से वहां अफरा-तफरी मच गई. इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई. धमाके के बावजूद जमात प्रमुख रैली में पहुंचे. इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘हम मानते हैं कि जिंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है’.

उन्होंने कहा कि जमात-ए-इस्लामी बिना किसी डर के लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेगी, चित्राल से लेकर कराची तक 24 करोड़ लोग आग में जल रहे हैं, लोग अपने घरों, मस्जिदों और बाजारों में सुरक्षित नहीं हैं. जमात प्रमुख सिराजुल हक ने कहा कि हुक्मरानों ने जनता का शोषण किया है, उनके अधिकार छीने है, और इन हुक्मरानों ने पाकिस्तान को विश्व शक्तियों का अस्तबल बना दिया है. उन्होंने कहा कि देश में अब आग पर पानी डालने का समय आ गया है. इस बीच जमाते इस्लामी पाकिस्तान ने एलान किया है कि जमात प्रमुख पर हुए आत्मघाती हमले के विरोध में देश के अलग अलग हिस्सों में आज विरोध और प्रदर्शन किए जाएंगे.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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