Home ताज़ातरीन नहीं देंगे एक भी इंच…’, सीमा विवाद से जुड़े महाराष्ट्र के प्रस्ताव पर बोले कर्नाटक सीएम बोम्मई

नहीं देंगे एक भी इंच…’, सीमा विवाद से जुड़े महाराष्ट्र के प्रस्ताव पर बोले कर्नाटक सीएम बोम्मई

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नहीं देंगे एक भी इंच…’, सीमा विवाद से जुड़े महाराष्ट्र के प्रस्ताव पर बोले कर्नाटक सीएम बोम्मई

महाराष्ट्र विधानसभा द्वारा मंगलवार को कर्नाटक से चल रहे सीमा विवाद को लेकर पास किए गए प्रस्ताव की कर्नाटक के सीएम बसवराज बोम्मई ने कड़ी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि वो हमें बांट रहे हैं.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मंगलवार को कहा, “वो हमें भड़काकर बांटने की कोशिश कर रहे हैं. हम इसकी निंदा करते हैं.” राज्य पुनर्गठन एक्ट 1956 में पास किया गया. तब से ही दोनों राज्यों (महाराष्ट्र और कर्नाटक) के लोग मिलकर सद्भाव से रह रहे हैं.

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने एक प्राइवेट न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि महाराष्ट्र राजनीति कर रहा है. यह सिर्फ एक नौटंकी है. उन्होंने कहा कि हम अपनी एक इंच भी जमीन महाराष्ट्र को नहीं देंगे. हम कन्नड लोगों के हितों में काम करते रहेंगे. इसके अलावा उन्होंने सवाल किया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के पास है तो वो प्रस्ताव क्यों पारित कर रहे हैं? हमें कोर्ट पर भरोसा है.

इस दौरान सीएम बोम्मई ने कहा कि हमारा प्रस्ताव महाराष्ट्र से अलग है. हमने किसी को जमीन लेने के लिए नहीं कहा है, लेकिन वो हमारी जमीन लेना चाहते हैं.

बता दें कि महाराष्ट्र के दोनों सदनों ने मंगलवार को कर्नाटक के साथ बढ़ते सीमा विवाद के बीच पड़ोसी राज्य में स्थित 865 मराठी भाषी गांवों का अपने प्रदेश में विलय करने पर कानूनी रूप से आगे बढ़ने और दक्षिणी राज्य से सीमावर्ती इलाकों में रह रहे मराठी लोगों की सुरक्षा की गारंटी देने के लिए केंद्र से कहने संबंधी प्रस्ताव सर्व सम्मति से पारित किया था.

गौरतलब है कि महाराष्ट्र पूर्ववर्ती बंबई प्रेसीडेंसी का हिस्सा रहे बेलगावी पर दावा करता है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में मराठी भाषी लोग रहते हैं. वह कर्नाटक के 800 से ज्यादा मराठी भाषी गांवों पर भी दावा करता है. जबकि कर्नाटक का कहना है कि सीमांकन, राज्य पुनर्गठन कानून और 1967 की महाजन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार भाषाई आधार पर किया गया था, जो हमारा और अंतिम है.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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