Home ताज़ातरीन जब नाइंसाफ़ी होगी तो दख़ल देना हमारा फ़र्ज़ हैः CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

जब नाइंसाफ़ी होगी तो दख़ल देना हमारा फ़र्ज़ हैः CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

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जब नाइंसाफ़ी होगी तो दख़ल देना हमारा फ़र्ज़ हैः CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

चीफ़ जस्टिस ऑफ़ इंडिया जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने एक केस का हवाला देते हुए बड़ा बयान दिया है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने रविवार को कहा कि अदालतें नीतिगत मामलों में हमेशा दख़ल नहीं दे सकतीं हैं.

उन्होंने कहा कि ‘सुप्रीम कोर्ट को एडमीशन के पहले भी दख़ल देना पड़ा था. मेरे पास एक मुकदमा आया जिसमें एक स्टूडेंट को विकलांग होने की वजह से एमबीबीएस में एडमीशन नहीं मिल रहा था. इसके अलावा नीट जैसे केसेज़ भी मेरी बेंच के सामने आए.’

सीजेआई ने कहा कि ‘जब भी नाइंसाफ़ी होती है, तो ये हमारा फ़र्ज़ बन जाता है कि हम उसमें दख़ल दें.’ उन्होंने कहा कि न्याय का सिद्धांत क़ानून और मेडिसिन दोनों क्षेत्रों पर लागू होता है. क़ानून में हरेक के साथ निष्पक्षता बरती जाती है और मेडिसिन के क्षेत्र में हर किसी को एक समान सेवा पाने का अधिकार है.

बता दें कि सीजेआई जस्टिस चंद्रचूड़ रविवार को दिल्ली में सर गंगा राम अस्पताल की ओर से आयोजित 19वें सर गंगा राम भाषण शृंखला में बोल रहे थे.

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पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.

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