Thursday, February 29, 2024
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आप जानते हैं कि क्वाड के सदस्य देशों से चीन की क्या दुश्मनी है ?

 

अखिलेश अखिल

 

जापान की राजधानी टोक्यो में क्वाड की बैठक बुधवार संपन्न हो गई. इस बैठक में सदस्य देशों ने कई मसलों पर चर्चा की है, लेकिन चीन को लेकर सबकी चिंताएं सामान थी. सभी सदस्य देशों ने चीन की विस्तारवादी नीतियों की भर्त्सना की और एक जुट होकर चीन का मुकाबला करने का संकल्प भी किया. क्वाड की बढ़ती ताकत को देखते हुए अब इस मंच से कई और देश भी जुड़ने को आतुर हैं. खासकर हिन्द – प्रशांत क्षेत्र के देश क्वाड में कई तरह की संभावना देख रहे हैं. अभी इस मंच के चार देश सदस्य हैं. अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और भारत इस मंच के फाउंडर सदस्य हैं.

बता दें कि क्वॉड से चीन बहुत ज्यादा परेशान रहता है. ग्रुप में शामिल सभी देशों से किसी न किसी मुद्दे को लेकर चीन से दुश्मनी है. जब क्वॉड बनाया गया था, तभी चीन ने कहा था कि क्वॉड सीधे तौर पर चीन को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है. हालांकि अमेरिका ने इस पर कहा था कि क्वॉड के निशाने पर कोई देश नहीं है.

जापान ने 2007 में क्वॉड बनाने की पहल की थी. चीन और रूस ने इसका विरोध किया था. 10 साल तक यह आइडिया रुका रहा. 2017 में इसे फिर एक्टिव किया गया. इस ग्रुप का मकसद समुद्र के रास्तों को किसी भी प्रभाव या कहें चीन के दबाव से मुक्त कराना है. चीन हिंद – प्रशांत क्षेत्र के तमाम ट्रेड रूट्स पर कब्जा करने के बाद वहां से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूलना चाहता है.

अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्वॉड के देशों से चीन की क्या दुश्मनी है और चीन इस ग्रुप का लगातार विरोध क्यों करता आया है ? इस सवाल के तह में जाने से पता चलता है कि चीन का लगभग क्वाड के सभी देशों के साथ अनबन है और सीमा विवाद भी.

भारत-चीन के बीच लद्दाख को लेकर विवाद जारी है. मई 2020 में लद्दाख में बातचीत करने गई भारतीय मिलिट्री यूनिट पर चीनी सैनिकों ने धोखे से हमला कर दिया था. इसमें भारत के कमांडिंग ऑफिसर समेत 20 सैनिक शहीद हो गए थे. गलवान वैली में 3 घंटे तक झड़प चली थी. अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस झड़प में 40 से ज्यादा चीनी सैनिक भी मारे गए थे. वैसे, लद्दाख ही नहीं बल्कि अरुणाचल प्रदेश में भी सीमा को लेकर भारत-चीन का विवाद चल रहा है. चीन भारत के हजारों किलोमीटर हिस्से पर दावा करता है, जिसके बाद से भारत-चीन के बीच टकराव जारी है. समय-समय पर इन दोनों देशों की सीमा पर टकराव की खबरें आती रहती हैं.

भारत की तरह ही चीन और ऑस्ट्रेलिया के बीच भी कई मुद्दों को लेकर विवाद चलते आया है. ये 3 प्रमुख ऐसे विवाद हैं, जिनसे दोनों देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है:-

अमेरिका से लेकर ऑस्ट्रेलिया और जापान से लेकर अफ्रीका के समुद्री इलाकों तक ड्रैगन की गतिविधियों से कई देश परेशान हैं. इस बीच ऑस्ट्रेलिया ने दावा किया था कि चीन उनके देश की जासूसी कर रहा है और ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट पर नजर रख रहा है.

नवंबर में भी इन दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था. तब ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के अधिग्रहण के लिए संयुक्त राज्य और यूनाइटेड किंगडम के साथ एक समझौते की घोषणा की थी.

चीन ने हाल ही में सोलोमन द्वीप के साथ एक सुरक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इस द्वीप में चीन ने पूरी प्लानिंग के तहत मिलिट्री बेस बनाया है. इसी समझौते का ऑस्ट्रेलिया विरोध कर रहा है.

इसी तरह से चीन और जापान की दुश्मनी बहुत पुरानी है. वर्ल्ड वॉर-2 के समय यह ज्यादा बढ़ी. मौजूदा समय में भी दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल है. तनाव एक आईलैंड को लेकर है. यह है प्रशांत महासागर में जापान के दक्षिण में स्थित सेनकाकु आईलैंड. जापान इसे सेनकाकू तो चीन इसे दियाआयू नाम देता है. अभी ये आईलैंड जापान के पास है, लेकिन चीन इस पर अपना हक जताता आया है.

चीन और अमेरिका का विवाद जग जाहिर है. ताइवान की सीमा में चीन लगातार घुसपैठ की कोशिश कर रहा है. इसी को लेकर अमेरिका-चीन के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने हाल ही में एक बैठक में कहा था कि अगर चीन की ओर से ताइवान पर हमला किया जाता है तो अमेरिका मिलिट्री एक्शन लेगा. उन्होंने कहा था कि ताइवान की सीमा पर घुसपैठ करके चीन खतरा मोल ले रहा है. इस पर, चीन ने पलटवार करते हुए कहा – हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए तैयार हैं.

वैसे चीन और अमेरिका का ट्रेड, टेक्नोलॉजी चोरी और साउथ चाइना सी समेत तमाम मुद्दों पर विवाद है. डोनाल्ड ट्रम्प तो चीन को अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन बताते थे. अब बाइडेन ने एशिया में भारत को साथ लेकर चीन का मुकाबला करने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं.

Anzarul Bari
Anzarul Bari
पिछले 23 सालों से डेडीकेटेड पत्रकार अंज़रुल बारी की पहचान प्रिंट, टीवी और डिजिटल मीडिया में एक खास चेहरे के तौर पर रही है. अंज़रुल बारी को देश के एक बेहतरीन और सुलझे एंकर, प्रोड्यूसर और रिपोर्टर के तौर पर जाना जाता है. इन्हें लंबे समय तक संसदीय कार्रवाइयों की रिपोर्टिंग का लंबा अनुभव है. कई भाषाओं के माहिर अंज़रुल बारी टीवी पत्रकारिता से पहले ऑल इंडिया रेडियो, अलग अलग अखबारों और मैग्ज़ीन से जुड़े रहे हैं. इन्हें अपने 23 साला पत्रकारिता के दौर में विदेशी न्यूज़ एजेंसियों के लिए भी काम करने का अच्छा अनुभव है. देश के पहले प्राइवेट न्यूज़ चैनल जैन टीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर शो 'मुसलमान कल आज और कल' को इन्होंने बुलंदियों तक पहुंचाया, टीवी पत्रकारिता के दौर में इन्होंने देश की डिप्राइव्ड समाज को आगे लाने के लिए 'किसान की आवाज़', वॉइस ऑफ क्रिश्चियनिटी' और 'दलित आवाज़', जैसे चर्चित शोज़ को प्रोड्यूस कराया है. ईटीवी पर प्रसारित होने वाले मशहूर राजनीतिक शो 'सेंट्रल हॉल' के भी प्रोड्यूस रह चुके अंज़रुल बारी की कई स्टोरीज़ ने अपनी अलग छाप छोड़ी है. राजनीतिक हल्के में अच्छी पकड़ रखने वाले अंज़र सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय खबरों पर अच्छी पकड़ रखते हैं साथ ही अपने बेबाक कलम और जबान से सदा बहस का मौज़ू रहे है. डी.डी उर्दू चैनल के शुरू होने के बाद फिल्मी हस्तियों के इंटरव्यूज़ पर आधारित स्पेशल शो 'फिल्म की ज़बान उर्दू की तरह' से उन्होंने खूब नाम कमाया. सामाजिक हल्के में अपनी एक अलग पहचान रखने वाले अंज़रुल बारी 'इंडो मिडिल ईस्ट कल्चरल फ़ोरम' नामी मशहूर संस्था के संस्थापक महासचिव भी हैं.
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